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देहरादून की 129 बस्तियों के 50 हजार घर टैक्स से बाहर! लेकिन ऐसा क्‍यों?

deltin33 3 hour(s) ago views 595
  

नगर निगम को सालाना लाखों का नुकसान, अधर में लटकी बस्तियां. Concept Photo



जागरण संवाददाता, देहरादून। राजधानी देहरादून की बस्तियों पर नगर निगम खुद ही असमंजस में है। सरकार के अध्यादेश के भरोसे टिकी बस्तियों का न तो नियमितीकरण हो रहा है और न ही उनसे नगर निगम भवन कर वसूल पा रहा है। शासनादेश के इंतजार में फिलहाल कर वसूली ठप है और निगम को सालाना लाखों का नुकसान हो रहा है। वर्ष 2022-23 में बस्तियों पर लगाए गए हाउस टैक्स को रोक दिए जाने के बाद अब तक दोबारा यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।  

देहरादून नगर निगम क्षेत्र में रिस्पना और बिंदाल समेत अन्य नदी-नालों के किनारे कुल 129 बस्तियां चिहि्नत हैं। इनमें अधिकांश घर नदी किनारे बसे हुए हैं। इन बस्तियों के मकानों पर पूर्व में नगर निगम ने हाउस टैक्स लगाया था, लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया। इसके बाद यह कहा गया कि आनलाइन टैक्स के बजाय मैनुअल तरीके से टैक्स वसूला जाएगा और इसके लिए बस्तियों में कैंप लगाए जाएंगे, लेकिन यह योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। मौजूदा समय में बस्तियां पूरी तरह टैक्स के दायरे से बाहर ही चल रही हैं। नगर निगम प्रशासन का तर्क है कि शासन से इस संबंध में कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला है।

प्रदेश में कुल 582 बस्तियां बताई जाती हैं, जिनमें से 129 केवल देहरादून नगर निगम में ही हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि शासन का जीओ आने के बाद ही टैक्स लगाने की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकेगी। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त राजेश नैथानी का कहना है कि मलिन बस्तियों में हाउस टैक्स पूर्व में लगाया गया था, लेकिन शासन से जीओ न आने के कारण फिलहाल टैक्स नहीं लिया जा रहा है। मैनुअल टैक्स की बात जरूर हुई थी, लेकिन अभी शासन के आदेश का इंतजार है।
एलिवेटेड रोड भी मानी जा रही एक कारण

हाउस टैक्स पर रोक के पीछे रिस्पना और बिंदाल नदी पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड और एनजीटी के आदेश भी बड़ा कारण माने जा रहे हैं। नदी किनारे बनने वाली एलिवेटेड रोड की जद में कई बस्तियां और मकान आ रहे हैं। वहीं, एनजीटी के निर्देश पर रिस्पना नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को चिह्नित कर वहां से लोगों के विस्थापन की बात कही गई है। हाईकोर्ट के निर्देशों के चलते भी नदी किनारे निर्माण को लेकर सख्ती बढ़ी है। रिस्पना और बिंदाल नदी किनारे ही 300 से अधिक पर्यावरण मित्रों के घर बताए जाते हैं। ये सभी नगर निगम के कर्मचारी हैं और वर्षों से यहीं रह रहे हैं। एलिवेटेड रोड और फ्लड जोन की जद में आने से इन परिवारों में भय का माहौल है।

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