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15 साल की छुट्टी, कंपनी बोली- बैठे रहो 65 साल तक सैलरी देंगे, शख्स बोला- पैसे क्यों नहीं बढ़ाए, कोर्ट में मिलो

deltin33 3 hour(s) ago views 408
  

15 साल की छुट्टी, कंपनी बोली- बैठे रहो 65 साल तक सैलरी देंगे, शख्स बोला- पैसे क्यों नहीं बढ़ाए, कोर्ट में मिलो



नई दिल्ली। आज के समय में अगर आपके पास नौकरी है तो यही बहुत बड़ी बात है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसी कहानी सुनी है कि कोई कर्मचारी लगातार 15 साल से सिक लीव पर हो। इसके बाद कंपनी बोले कि हम आपको 65 साल की उम्र तक फ्री में बैठे-बैठे सैलरी देंगे, आपको काम करने की जरूरत नहीं।

ऐसी नौकरी की हर कोई कामना करता है। ऐसा ही IBM ने अपने एक कर्मचारी के साथ किया था। लेकिन सालों से सैलरी में इजाफा न होने से कर्मचारी नाराज था, तो उसने कह दिया कि आओ कोर्ट में मिलो। इतना पढ़कर आप यह तो समझ गए होंगे कि यह कहानी रोचक है। तो आइए जानते हैं उस शख्स के बारे में और कोर्ट के निर्णय के बारे में।
IBM के कर्मचारी की अनोखी कहानी

यह कहानी है इयान क्लिफोर्ड नाम के शख्स की। वह IBM में काम करता था। 2008 में इयान बीमार हो गए तो वह सिक लिव पर चले गए। छुट्टी बढ़ती गई। लेकिन कंपनी ने उन्हें नौकरी से नहीं निकाला।

एक दिन पता चला कि इयान क्लिफोर्ड को गंभीर बीमारी है। 2008 में वह सिक लीव पर गए थे। 5 साल बीत चुके थे। कंपनी ने उनकी सैलरी रोक रखी थी। इयान ने कहा- कोर्ट में मिलो। उन्होंने जैसे ही कंपनी के खिलाफ शिकायत की तो आईबीएम हरकत में आया और उन्होंने एक समझौता किया। समझौता था कि कंपनी इयान को 65 साल की उम्र तक उनकी सैलरी का 75% हिस्सा देती रहेगी। यानी घर बैठे उन्हें सैलरी मिलती रहेगी।
2022 में फिर घूमा इयान का दिमाग

2013 में IBM से समझौते के बाद इयान क्लिफोर्ड को सैलरी मिलना शुरू हो गई। वह अपनी सैलरी से खुश थे। लेकिन फिर आया साल 2022। इयान को महसूस हुआ कि उनके साथ नाइंसाफी हो रही है। उन्हें इस बात का अफसोस था कि इतने साल हो गए, लेकिन कंपनी ने उनकी सैलरी में कोई इजाफा नहीं किया।

उधर कंपनी इस बात से पहले ही चिंतित थी कि वह इयान को बिना काम के फ्री में सैलरी दे रही और इधर इयान सैलरी न बढ़ने से खुश थे। इयान ने एक बार फिर कंपनी से कहा- चलो कोर्ट में मिलो। एक बार फिर से 9 साल बाद IBM और इयान क्लिफोर्ड कोईट में आमने-सामने थे।

2022 में, क्लिफोर्ड ने फिर से IBM पर मुकदमा किया। वह उन्हें एक एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल में ले गए, इस बार डिसेबिलिटी भेदभाव का आरोप लगाते हुए।

उनका तर्क था कि 2013 से महंगाई के हिसाब से उनके फिक्स्ड सालाना पेमेंट नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि IBM उनके साथ उनकी डिसेबिलिटी की वजह से गलत व्यवहार कर रही थी।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कीमतें बढ़ रही थीं, उनकी इनकम की वैल्यू कम होती जा रही थी।
कोर्ट ने कहा- बहुत हुआ, अब नहीं...

मामला कोर्ट में पहुंचा। लेकिन इस बार कोर्ट ने साफ-साफ कह दिया कि बहुत हुआ। अब नहीं। कोर्ट का यह संदेश इयान क्लिफोर्ड के लिए था। ट्रिब्यूनल जज ने उनका केस खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि कंपनी आपको जिंदगी भर घर बैठे सैलरी दे रही है। इयान को मिलने वाला यह फायदा ही अपने आप में बहुत बड़ा है। इयान दिव्यांग की श्रेणी में आ गए थे। इसलिए उन्हें यह यह फायदा मिल रहा है। लेकिन जो कर्मचारी विकलांग नहीं है, उन्हें इस तरह का कोई फायदा नहीं मिलता। इसलिए इयान द्वारा दायर की गई याचिका को रद्द किया जाता है।

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