बसंत पंचमी इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है।
जागरण संवाददाता, नोएडा। बसंत पंचमी इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही मां सरस्वती की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि इस बार बसंत पंचमी पर कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं, जिससे यह दिन ज्ञान, कला और विद्या के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
इस दिन कई दुर्लभ योग के साथ ही अबूझ मुहूर्त का योग भी है। ऐसे में विवाह, वाहन खरीदी, गृहप्रवेश, प्रापर्टी खरीदी आदि शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इसका मतलब है कि इस दिन किसी भी शुभ काम के लिए पंडित जी से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती,पूरा दिन ही पवित्र होता है।
नोएडा के ज्योतिषाचार्य आचार्य सतीश के अनुसार, बसंत पंचमी को स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन सामान्य रूप से विवाह, गृह प्रवेश जैसे कार्य किए जाते हैं, लेकिन वर्ष 2026 में शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। इसके बावजूद सरस्वती पूजा, विद्या आरंभ, संगीत, कला और बौद्धिक कार्यों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है।
इस वर्ष बसंत पंचमी पर बुधादित्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग करियर, शिक्षा और व्यापार में उन्नति देने वाला माना जाता है। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना प्रबल होती है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य ज्ञानप्रकाश अवस्थी बताते हैं, इस बार बसंत पंचमी पर गजकेसरी योग भी बन रहा है, जो मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए विशेष लाभकारी सिद्ध हो सकता है। यह योग धन वृद्धि, मान-सम्मान और स्थिरता का संकेत देता है। विद्यार्थियों के लिए यह समय परीक्षा, प्रतियोगिता और नई शिक्षा की शुरुआत के लिए श्रेष्ठ है।
सरस्वती पूजा का श्रेष्ठ समय
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सरस्वती पूजा का श्रेष्ठ समय सुबह लगभग 7 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान पीले वस्त्र धारण करना, पीले फूल और पीले पकवानों का भोग लगाना शुभ माना गया है। छोटे बच्चों के लिए अक्षरारंभ संस्कार और विद्यार्थियों के लिए विद्या आरंभ इस दिन विशेष फल देता है।
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