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हर 8 मिनट में सर्वाइकल कैंसर से एक मौत, आंकड़े डराते हैं; लेकिन वैक्सीनेशन और जांच दे सकते हैं नई उम्मीद

cy520520 2026-1-19 20:26:52 views 557
  

सर्वाइकल कैंसर हर आठ मिनट में हो जाती है एक मौत।



अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। भारत में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) से हर आठ मिनट में एक महिला की मौत हो रही है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारण है। स्थिति गंभीर है पर, विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण और समय पर जांच से इसे रोका जा सकता है। इसलिए सरकार, विशेषज्ञ और चिकित्सा संस्थानों ने मिलकर इससे निपटने को गति, पैमाना और समन्वय तीनों पर अनिवार्य रूप से काम करने पर जोर दिया हैं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के असिस्टेंट प्रोफेसर, रेडिएशन आंकोलाॅजी, कैंसर विकिरण चिकित्सा प्रो. डाॅ. अभिषेक शंकर ने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के अनुसार संस्थान भारत में सर्वाइकल कैंसर से हर आठ मिनट में एक महिला की मौत हो जाती है।

इस गंभीर स्थिति को रोकने के लिए केंद्र सरकार, राज्यों के स्वास्थ्य मिशन, कैंसर संस्थान, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने विशेषज्ञ टीकाकरण, स्क्रीनिंग और उपचार की एकीकृत रणनीति के तहत मिलकर काम करने की सहमति दी हैं।

सभी का मानना है कि सर्वाइकल कैंसर केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी मुद्दा है, क्योंकि इसका सबसे अधिक असर गरीब और ग्रामीण महिलाओं पर पड़ता है। कहाकि देश के पास संसाधन, तकनीक और नीति मौजूद हैं। आवश्यकता तेजी से इस पर अमल की है। दावा किया कि अगर सफल रहे तो हर आठ मिनट में बंद हो जो वाली एक जिंदगी की घड़ी को हमेशा के लिए थामा जा सकता है।
आंकड़े चिंताजनक पर, उम्मीद कायम

देश में सर्वाइकल कैंसर के हर साल करीब 1.23 लाख नए मामले सामने आते हैं, जिसमें से लगभग 77 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। डाॅ. अभिषेक शंकर ने बताया कि ह्युमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण से जुड़ी इस बीमारी को प्रभावी टीकाकरण, समय पर जांच से रोका जा सकता है।

बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार, अब तक 10 करोड़ से अधिक महिलाओं की जांच जनसंख्या-आधारित कार्यक्रमों के तहत की जा चुकी है। दावा किया कि यह दुनिया के सबसे बड़े स्क्रीनिंग अभियानों में से एक है। पर, यह कुल लक्ष्य की तुलना में पर्याप्त नहीं।
टीकाकरण और डीएनए जांच

डाॅ. अभिषेक शंकर के अनुसार सर्वाइकल कैंसर पर प्रभावी रोकथाम के लिए ह्युमन पैपिलोमा वायरस टीकाकरण का दायरा तेजी से बढ़ाना होगा, विशेष रूप से नौ से 14 वर्ष की लड़कियों में। पारंपरिक जांच विधियों के स्थान पर अधिक सटीक मानव पैपिलोमा वायरस डीएनए आधारित जांच को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाना होगा।

डीएनए आधारित जांच व स्वनमूना पद्धति से उन महिलाओं तक पहुंच बनाई जा सकेगी जो सामाजिक, आर्थिक व भौगोलिक कारणों से अस्पताल नहीं पहुंच पातीं।  
नीति से इलाज तक की पूरी कड़ी

डाॅ. अभिषेक शंकर ने दावा किया कि देश में अब तक स्क्रीनिंग के बाद उपचार सबसे बड़ी चुनौती रही है। इसे दूर करने के लिए राष्ट्रीय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), हब एवं स्पोक माॅडल और उपचार तथा फाॅलोअप की व्यवस्था लागू होने के बाद जांच में पाॅजीटिव पाई गई कोई भी महिला इलाज से वंचित नहीं रहेगी और हम सर्वाइकल कैंसर को प्रभावी तरीके से रोक सकेंगे।
14 वर्ष से कम पर दो डोज, अधिक पर तीन

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए दिया जाने वाला एचपीवी टीका नौ–14 वर्ष की उम्र में दो डोज और 15 वर्ष से अधिक आयु में तीन डोज में लगाया जाता है। निजी अस्पतालों में इसकी कीमत वैक्सीन के अनुसार 2,000 से 11,000 प्रति डोज तक होती है। बताया गया कि भारत में विकसित सर्वावैक को सरकार कुछ राज्यों व कार्यक्रमों में मुफ्त या 200 से 400 प्रति डोज की दर से उपलब्ध करा रही है।

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