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व‍िधायक के न‍िधन से पहले का राज : जिंदगी को दगा देने से पहले 45 मिनट छटपटाया था दिल

cy520520 2026-1-5 13:26:34 views 973
  

द‍िवंगत प्रो. श्‍यामबि‍हारी लाल



अभि‍षेक पांडेय, जागरण, बरेली। भाजपा विधायक प्रो. श्यामबिहारी का दिल दगा दे गया मगर, उससे पहले छटपटाते हुए भीषण कष्ट के संकेत दिए थे। सीने में दर्द, माथे पर पसीना, लड़खड़ाई हुई आवाज...! सर्किट हाउस में ये लक्षण देख परिचित चिकित्सक ने उन्हें तात्कालिक उपचार दिया परंतु, इसके बाद का \“जीवनरक्षक समय\“ अस्पताल चयन में खत्म हो गया।

सर्किट हाउस से बीसलपुर तिराहा तक 45 मिनट बीतने के बाद भी चयनित अस्पताल पांच-आठ मिनट दूर था। उसी दौरान आखिरी हिचकी के साथ प्रो. श्यामबिहारी ने दुनिया छोड़ दी। उनके चिकित्सक मित्र के पास माथा पकड़कर बैठने के अलावा विकल्प नहीं था...काश! 45 मिनट बर्बाद होने के बजाय नजदीकी अस्पताल में उपचार शुरू हो जाता, जोकि पांच-पांच मिनट की दूरी पर दो थे।

फरीदपुर सीट से विधायक प्रो. श्यामबिहारी लाल की बाईपास सर्जरी वर्ष 2006 में हो चुकी थी, पांच महीने पहले एंजियोप्लास्टी हुई। गुरुवार को जन्मतिथि समारोह में वह असहज थे। इसके बाद शुक्रवार दोपहर दो बजे सर्किट हाउस में तबीयत बिगड़ी तो कहा कि आज दवा खाना भूल गया, इसके बाद कक्ष में चले गए। उनकी हालत देखकर परिचित चिकित्सक तुरंत कक्ष में पहुंचे तो भांप गए कि हार्ट अटैक हुआ है।

उन्होंने विधायक के दोनों पैर तुरंत ऊपर किए गए, ताकि रक्त प्रवाह बढ़ने से मस्तिष्क तक आक्सीजन पहुंच जाए। पांच मिनट में थोड़ा आराम मिलने पर विधायक ने ड्राइवर से कहा कि पड़ोस के डा. शिरीष गुप्ता के क्लीनिक ले चलो। वहां जांच में उनकी नब्ज छूटती जा रही थी, ब्लड प्रेशर गिरता जा रहा था।

स्थिति अतिगंभीर होने पर डा. शिरीष ने आक्सीजन व कुछ दवाएं देकर तुरंत हायर सेंटर ले जाने को कहा। वहां से आइसीयू-वेंटीलेटर आदि उच्च सुविधायुक्त दो बड़े अस्पताल पांच-दस मिनट की दूरी पर थे मगर, प्रो. श्यामबिहारी ने कहा कि पीलीभीत रोड पर मेडिसिटी अस्पताल लेकर चलें। रास्ते में उनका निधन हो गया। एंबुलेंस में उन्हें सीपीआर दिया गया, वह भी सफल नहीं हुआ। अस्पताल पहुंचने पर बीपी व पल्स नहीं थी।

हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि इतनी गंभीर स्थिति में नजदीकी अस्पताल में तत्काल भर्ती कराना बेहतर रहता है। सर्किट हाउस में विधायक के सीने में दर्द, पसीने के साथ आवाज का लड़खड़ाना संकेत था कि हार्ट अटैक के कारण उनके मस्तिष्क में आक्सीजन पहुंचना बंद हो चुकी थी।

वहां मौजूद चिकित्सक ने उनके दोनों पैर उल्टे किए थे, जिससे पैरों का करीब दो लीटर रक्त तेज प्रवाह के साथ मस्तिष्क की ओर गया। इससे उनके मस्तिष्क में थोड़ी आक्सीजन पहुंची, जिससे वह कुछ देर को संभले, दोबारा बोलने लगे थे। चिकित्क सतर्क करते हैं कि शरीर हमें बीमारी होने या इसके बढ़ने का संकेत देता है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

  

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