cy520520 • 2026-1-1 22:13:15 • views 644
इन मंत्रों का करें जाप (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज की आधुनिक जीवनशैली में महिलाएं एक साथ कई भूमिकाएं निभाती हैं। ऐसे में कभी-कभी मानसिक थकान और आत्मविश्वास की कमी महसूस होना स्वाभाविक है। हिंदू धर्म में मां दुर्गा को शक्ति, साहस और धैर्य का प्रतीक माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में कुछ ऐसे मंत्रों का वर्णन है, जिनका नियमित जाप महिलाओं के भीतर की सुप्त ऊर्जा को जागृत कर सकता है और उन्हें हर चुनौती से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
शक्ति और मानसिक शांति के लिए 5 दिव्य मंत्र
1. भय से मुक्ति का मंत्र
मंत्र: “ॐ दुं दुर्गायै नमः“
प्रभाव: यह मां दुर्गा का बीज मंत्र है। यह आपके मन से अनजाने डर और असुरक्षा की भावना को खत्म करता है। जब भी आप किसी कठिन परिस्थिति में हों, इसका मानसिक जाप आपको तुरंत सुरक्षा का अनुभव कराएगा।
2. आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान के लिए
मंत्र: “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥“
प्रभाव: यह मंत्र महिला की आंतरिक शक्ति का सम्मान करता है। यह आपको एहसास दिलाता है कि आप स्वयं शक्ति का रूप हैं। इसके जाप से आत्म-सम्मान (Self-esteem) में वृद्धि होती है।
3. जीवन में शुभता और संतुलन के लिए
मंत्र: “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥“
प्रभाव: यह मंत्र जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और मंगल लाने वाला है। यह मानसिक तनाव को कम कर मन को शांत और संतुलित रखने में मदद करता है।
(Image Source: Freepik)
4. एकाग्रता और फोकस बढ़ाने के लिए
मंत्र: “ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः“
प्रभाव: यह मंत्र उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो करियर और घर के बीच तालमेल बिठाने में मुश्किल महसूस करती हैं। यह एकाग्रता बढ़ाता है और भ्रम की स्थिति को दूर करता है।
5. साहस और नेतृत्व क्षमता के लिए (दुर्गा गायत्री)
मंत्र: “ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारी धीमहि तन्नो दुर्गि प्रचोदयात्॥“
प्रभाव: मां कात्यायनी संघर्षों को जीतने की शक्ति देती हैं। यह मंत्र नेतृत्व के गुणों को निखारता है और आपको सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।
जाप करने की सरल विधि
इन मंत्रों का जाप सुबह स्नान के बाद या रात को सोने से पहले शांत स्थान पर बैठकर करें।
मंत्रों को पढ़ते समय अपना ध्यान अपनी सांसों और मंत्र की ध्वनि पर केंद्रित करें।
नियमितता (Consistency) सबसे जरूरी है; इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
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