search

‘जानाम आयोय रेंगेज रेहं…’, जमशेदपुर में भावुक हुईं राष्ट्रपति मुर्मू, गीत गुनगुनाया तो गूंज उठीं तालियां

Chikheang 2025-12-29 23:27:43 views 1175
  

सोमवार को जमशेदपुर में लोगों को संबोधित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जमशेदपुर के करनडीह में आयोजित ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह में सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भावुक और मानवीय स्वरूप देखने को मिला। अपने संबोधन के दौरान जब राष्ट्रपति ने संताली और ओड़िया साहित्य की पंक्तियों को गुनगुनाया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।    राष्ट्रपति ने गीतों और साहित्य के माध्यम से मातृभाषा, लिपि और सांस्कृतिक पहचान के महत्व को बेहद सरल लेकिन गहरे शब्दों में प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति ने ओल चिकी लिपि के जनक गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की लिखी संताली पंक्तियों को लयबद्ध स्वर में प्रस्तुत किया-

‘जानाम आयोय रेंगेज रेहं, उनी गेय हा:रा-हा।
जानाम रड़दो निधान रेहं, अना तेगे मारांग-आ।’

इन पंक्तियों का भावार्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि जैसे एक गरीब मां अपने बच्चे को कठिन परिस्थितियों में भी पालकर बड़ा करती है, वैसे ही हमारी मातृभाषा चाहे कितनी भी सीमित क्यों न हो, हमें जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है। मातृभाषा ही व्यक्ति को पहचान और आत्मबल देती है।

विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
लिपि से ही जुड़ी है समाज की एकता

राष्ट्रपति ने गुरु गोमके की एक और पंक्ति साझा करते हुए समाज को चेताया कि यदि हम अपनी लिपि और शिक्षा की उपेक्षा करेंगे, तो धीरे-धीरे अपनी पहचान खो बैठेंगे। उन्होंने कहा कि लिपि के बिखरने का अर्थ है समाज का बिखरना। यह केवल भाषा का सवाल नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने ओल चिकी लिपि को समाज को जोड़ने वाली रस्सी बताया। उन्होंने कहा कि लिपि और शिक्षा वह शक्ति है, जो समाज को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान और चेतना के प्रकाश की ओर ले जाती है। यह रस्सी समाज को एकता के सूत्र में बांधे रखती है।


ओड़िया कविता और अटल जी को नमन

राष्ट्रपति ने ओड़िया कविता की पंक्ति- ‘आऊ जेते भाषा पारूछ शिख, निज मातृभाषा महत रख’- का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे जितनी भाषाएं सीखें, मातृभाषा का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी नमन किया और कहा कि उनके प्रयासों से ही वर्ष 2003 में संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिला।



यह भी पढ़ें- राष्ट्रपति का झारखंड दौरा: भोजन की थाली पकवानों से सजी, रेड राइस-रागी की रोटी और ठेकुआ ने घोली मिठास

यह भी पढ़ें- सुरक्षा घेरा तोड़ अपनों के बीच पहुंचीं राष्ट्रपति, काफिला रुकवाकर बच्चों को दुलारा

यह भी पढ़ें- ओल चिकी संताल समाज का आत्मसम्मान, गुरु गोमके की देन को शताब्दी पर नमन: राज्यपाल

यह भी पढ़ें- Ol chiki संताल समाज की आत्मा, इसके विस्तार से मजबूत होगी सांस्कृतिक अस्मिता: हेमंत सोरेन
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
161098