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Uttarakhand: 2316 बेसिक शिक्षकों के दस्तावेजों की होगी जांच, प्रमाणपत्र में गड़बड़ी के मामले आए हैं सामने

cy520520 2025-12-16 21:07:27 views 421
  

सांकेतिक तस्वीर।



अशोक केडियाल, जागरण, देहरादून : प्रदेश में पिछले वर्ष 2906 बेसिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत नियुक्त हो चुके 2316 सहायक अध्यापकों के सभी शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। हाल ही में सौ से अधिक शिक्षकों के स्थायी निवास प्रमाण पत्र में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

विभिन्न जनपदों में तैनात कई शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश से डीएलएड करने के लिए वहां का स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाया और बाद में उत्तराखंड का स्थायी निवास दिखाकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।

विभाग ने सभी शिक्षकों के दस्तावेज की जांच करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग में पिछले साल हुई सहायक अध्यापकों की भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने से विभाग अब गंभीरता से कदम आगे बढ़ा रहा है। अब तक 136 से अधिक शिक्षकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

इन शिक्षकों पर एक ही समय पर दो-दो स्थायी निवास रखने के मामले में कार्रवाई की तलवार लटक रही है। मामले में जिला स्तर पर जांच के बाद नोटिस जारी किए जा रहे हैं। टिहरी में 42, चमोली में 28 और पौड़ी में 59 शिक्षक जांच के घेरे में आए हैं।

इसके अतिरिक्त ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार एवं नैनीताल में भी कम से कम दो सौ शिक्षकों के प्रमाण पत्रों पर संदेह व्यक्त किया गया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि डीएलएड प्रशिक्षण के लिए उत्तर प्रदेश का स्थायी निवास अनिवार्य दर्शाया गया, जबकि नियुक्ति के समय उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रस्तुत किया गया।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल ने कहा कि हरिद्वार में इस प्रकरण से पहले 42 शिक्षकों के मामलों की जांच की जा चुकी है, जबकि अन्य जिलों में ताजा भर्तियों को लेकर जांच जारी है। बेसिक शिक्षकों के रिक्त 2906 पदों के सापेक्ष भर्ती हुए सभी सहायक अध्यापकों के दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फर्जीवाड़ा करने वाले हर हाल में नपेंगे : शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि फर्जी शैक्षिक और निवास प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपितों की सेवाएं समाप्त की जाएंगी और आवश्यक होने पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज होंगे।

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