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ओडिशा में टाटा पावर के अतिरिक्त सुरक्षा जमा नोटिसों से उपभोक्ताओं में आक्रोश, 1500-2000 रुपए की नोटिस

LHC0088 2025-12-16 10:37:29 views 1265
  

सांकेतिक तस्वीर



जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। टाटा पावर द्वारा हाल ही में जारी किए गए अतिरिक्त सुरक्षा जमा की मांग वाले नोटिसों से ओडिशा भर के बिजली उपभोक्ताओं में व्यापक नाराजगी देखी जा रही है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें एसएमएस अलर्ट के जरिए 30 दिनों के भीतर 1,500 से 2,000 रुपये तक की अतिरिक्त राशि जमा करने के लिए कहा गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस फैसले का उपभोक्ता संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। संगठनों का कहना है कि न तो सुरक्षा जमा की किसी समीक्षा की पूर्व सूचना दी गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि अतिरिक्त राशि किस आधार पर तय की गई है।

भुवनेश्वर समेत राज्य के अन्य इलाकों के निवासियों ने ऐसे नोटिस मिलने की पुष्टि की है। भुवनेश्वर की उपभोक्ता श्वेता सामल ने बताया कि उन्हें एक महीने के भीतर अतिरिक्त सुरक्षा राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है। वहीं, सालेपुर विद्युत उपभोक्ता संघ ने इस निर्णय का खुलकर विरोध करते हुए इसे उपभोक्ताओं पर अनुचित आर्थिक बोझ बताया है और आंदोलन की चेतावनी दी है।

भुवनेश्वर की उपभोक्ता श्वेता सामल ने कहा कि हम इस महीने का बिजली बिल देखकर चौंक गए। जब हम हर महीने समय पर बिजली बिल चुका रहे हैं तो अतिरिक्त सुरक्षा जमा क्यों मांगा जा रहा है? यह हमारे लिए बोझ बनता जा रहा है।

सालेपुर विद्युत उपभोक्ता संघ के सदस्य नंद किशोर भूइयां ने कहा कि टाटा पावर द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा जमा के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली के खिलाफ हम विरोध करेंगे। हम औपचारिक रूप से आंदोलन की तैयारी शुरू करेंगे। कंपनी को उपभोक्ताओं का यह उत्पीड़न तुरंत बंद करना चाहिए।

मौजूदा नियमों के अनुसार, बिजली कनेक्शन लेते समय उपभोक्ताओं से स्वीकृत लोड के आधार पर सुरक्षा जमा लिया जाता है। ओडिशा विद्युत नियामक आयोग (ओइआरसी) के नियमों के तहत यह जमा आमतौर पर दो महीने के बिजली बिल के बराबर होता है। नियमों में यह भी प्रावधान है कि वार्षिक टैरिफ संशोधन के बाद पिछले 12 महीनों की खपत के आधार पर सुरक्षा जमा की समीक्षा की जा सकती है।

यदि पुनर्गणना के बाद आवश्यक सुरक्षा जमा मौजूदा जमा से 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाता है, तो उपभोक्ता से अंतर की राशि मांगी जा सकती है। वहीं, यदि अंतर 10 प्रतिशत के भीतर होता है, तो उसे आगामी बिजली बिलों में समायोजित किया जाता है।

हालांकि, उपभोक्ता और उनके संगठन सवाल उठा रहे हैं कि जब पिछले चार वर्षों से बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं हुई है, तो टाटा पावर ने सुरक्षा जमा की समीक्षा क्यों की। साथ ही, उपभोक्ताओं को पहले से कोई सूचना न देने और बिजली कनेक्शन के समय अतिरिक्त सुरक्षा जमा से संबंधित किसी स्पष्ट समझौते के अभाव को लेकर भी गंभीर आपत्तियां जताई जा रही हैं।
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