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पुलिस हिरासत में मौत मामले में चैनपुर थाना प्रभारी निलंबित, हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद 3 दारोगा लाइन हाजिर

LHC0088 2025-12-5 19:37:53 views 1206
  

झारखंड हाई कोर्ट(फाइल फोटो)



जागरण टीम, रांची/गुमला। गुमला जिले के चैनपुर थाना में पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की पिटाई पर झारखंड हाई कोर्ट द्वारा कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद गुमला एसपी ने चैनपुर के थाना प्रभारी कृष्ण कुमार को निलंबित कर दिया। साथ ही पुअनि दिनेश कुमार, नंदकिशोर महतो और निर्मल राय को लाइन हाजिर कर दिया।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गुरुवार को हाई कोर्ट में एसपी ने अदालत को पुलिस की कार्रवाई से अवगत कराया। हाई कोर्ट ने एसपी को पूरे मामले का रिकॉर्ड और घटना के दिन का चैनपुर थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने को कहा था।  
पीड़ित के ससुर के खिलाफ वारंट

कोर्ट के निर्देश के बाद गुरुवार को गुमला के एसपी हारिस बिन जमां अदालत में हाजिर हुए। इस दौरान झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत मौखिक टिप्पणी की कि कानून के राज में ऐसा किया जा रहा है, यह संकेत ठीक नहीं है। अदालत इस मामले को काफी गंभीरता से ले रहा है।  

एसपी ने कोर्ट में कार्रवाई करने की बात कही और अदालत को बताया कि इस मामले में गलती हुई है। पीड़ित के ससुर के खिलाफ वारंट है। पीड़ित ने ससुर से फोन पर बात की थी। इसी आलोक में पूछताछ के लिए थाने लाया गया था।  
बिना किसी प्राथमिकी अथवा शिकायत के हिरासत में लिया

इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि कोई बात कर ले तो क्या पुलिस किसी को थाना ले जाकर बेरहमी से पिटाई कर सकती है? इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया और कहा कि इस मामले में कई बिंदुओं पर विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा।  

यह मामला पीड़ित कयूम चौधरी की पत्नी नबीजा बीबी की याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया कि चैनपुर पुलिस ने एक दिसंबर 2025 को उनके पति को बिना किसी प्राथमिकी अथवा शिकायत के हिरासत में लिया और बेरहमी से पिटाई की। पिटाई की वजह से कयूम को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।  
प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग

याचिका में थाना प्रभारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की गई थी। जांच में सामने आया कि चैनपुर पुलिस, जमगाई निवासी जमरूद्दीन खान की गिरफ्तारी के प्रयास में उनके दामाद कयूम चौधरी को पूछताछ के नाम पर उठाकर ले गई, जबकि उनके खिलाफ कोई भी संज्ञेय अपराध दर्ज नहीं था। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि थाना प्रभारी द्वारा कयूम को हिरासत में लेना और मारपीट करना न्यायसंगत नहीं था।
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