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UP के सात जिलों के परिषदीय स्कूलों में MDM का सोशल ऑडिट करेगा IIT कानपुर, प्राधिकरण ने सभी BSA को जारी किया लेटर

Chikheang 2025-12-5 06:36:33 views 979
  



जागरण संवाददाता, कानपुर। परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन (एमडीएम) का सोशल आडिट आइआइटी कानपुर करेगा। संस्थान को कानपुर नगर के 39 परिषदीय, राजकीय व अशासकीय विद्यालय, मदरसों के साथ सात अन्य जिलों में एमडीएम के सोशल आडिट की जिम्मेदारी मिली है। प्रदेश भर में कुल 2885 विद्यालयों को सोशल आडिट के लिए चयनित किया गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

आइआइटी कानपुर के अलावा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी, जीबी पंत विश्वविद्यालय प्रयागराज, लखनऊ विश्वविद्यालय व गोरखपुर विश्वविद्यालय को भी आडिट करने के लिए अधिकृत किया गया है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की ओर से सभी बीएसए कार्यालयों को निर्देश भेजे गए हैं। बीएसए सुरजीत कुमार सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के सोशल आडिट के लिए विद्यालयों का चयन यू डायस कोड की अंतिम विषम संख्या के आधार पर किया जाएगा।

इन स्कूलों का नहीं होगा चयन

पहले जिन स्कूलों का आडिट हो चुका है, उनका चयन नहीं होगा। आइआइटी की टीम कानपुर नगर के 39 विद्यालय (चार ब्लाक) में घाटमपुर, ककवन, सदर बाजार व शास्त्री नगर ब्लाक के स्कूल, कानपुर देहात के 42 (चार ब्लाक), उन्नाव के 56 (छह ब्लाक), कन्नौज के 32 (तीन ब्लाक), इटावा के 32 (तीन ब्लाक), पीलीभीत के 31 (तीन ब्लाक), बरेली के 52 (पांच ब्लाक), फर्रुखाबाद के 34 (तीन ब्लाक) विद्यालय सौंपे गए हैं।

ब्लाक स्तर पर विद्यालयों के चयन में परिषदीय व राजकीय स्कूलों में अनिवार्य रूप से एक स्कूल, एक मदरसा (बेसिक), एक अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय (बेसिक), एक राजकीय विद्यालय, माध्यमिक व एक अशासकीय सहायता प्राप्त (माध्यमिक) को शामिल करना है। मदरसा न होने की स्थिति में दो अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय शामिल किए जाएंगे। सबसे कम नामांकन व अधिक नामांकन वाले विद्यालयों को भी शामिल करना होगा।

ऐसे समझें सोशल आडिट प्रक्रिया

एमडीएम सोशल आडिट प्रक्रिया के तहत अधिकृत संस्था के प्रतिनिधि संबंधित स्कूल में जाकर जांच बिंदुओं पर रिपोर्ट जुटाकर स्कूल का रिकार्ड चेक करते हैं। स्कूल की अवस्थापना, संसाधन व सुविधाओं को देखते हैं। स्कूल प्रबंध समिति के सदस्यों, अभिभावकों व ग्राम प्रधान, पार्षद, कोटेदार से भी एमडीएम की गुणवत्ता का फीडबैक लेते हैं। रिपोर्ट तैयार कर मध्याह्न भोजन प्राधिकरण को भेजी जाती है। रिपोर्ट में शामिल कमियों का संबंधित जिलों में सुधार कराया जाता है।
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