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कफ सीरप मामले में जांच एजेंसियों ने 400 से ज्यादा बैंक खाते किए चिह्नित, ED और STF ने तेज की इन्वेस्टिगेशन

Chikheang 2025-12-5 06:36:32 views 833
  



मनोज त्रिपाठी, जागरण लखनऊ। कोडीन युक्त कफ सीरप की तस्करी के सिंडिकेट से जुड़े दर्जनों आरोपितों की मुसीबत बढ़ने वाली है। मामले की जांच कर रही एजेंसियों को आरोपितों और उनकी फर्जी कंपनियों के 400 से ज्यादा बैंक खातों की जानकारी मिली है। एसटीएफ ने संबंधित बैंकों से इन खातों का पिछले पांच वर्षों का ट्रांजेक्शन का रिकार्ड मांगा है। हैरानी वाली बात यह है कि इनमें से कई खाते एक ही पते पर खोले गए हैं।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कफ सीरप मामले की जांच कर रही ईडी और एसटीएफ की टीम एक दूसरे के साथ सूचनाएं साझा कर रही हैं। अभी तक जांच में सामने आया है कि कफ सीरप के सिंडिकेट में करीब 210 फर्जी कंपनियां शामिल थीं। इनमें से ज्यादातर कंपनियों का पंजीकरण एक ही आइपी (इंटरनेट प्रोटोकाल) एड्रेस का इस्तेमाल करके किया गया था। कागजों पर बनी इन कंपनियों के संचालकों में करीब 312 लोगों के नाम शामिल हैं।

अब इन सभी लोगों के बैंक खातों की जानकारी खंगाली जा रही है। ईडी की एक टीम गुरुवार से इसी काम पर लगी है कि किस-किस खाते से किसे कितनी राशि स्थानांतरित की गई है। इससे कई और लोगों के नाम सामने आएंगे। बैंक खातों की जांच पूर्व सांसद धनंजय सिंह के भी गले की हड्डी बन सकती है। क्योंकि शुभम, अमित और आलोक के धनंजय से करीबी रिश्ते सामने आ चुके हैं। सूत्रों के अनुसार कफ सीरप के सिंडेकेट में शामिल विकास सिंह नरवे तस्करी से होने वाली कमाई का हिस्सा सिंडिकेट के अन्य सदस्यों तक पहुंचाता था। आजमगढ़ निवासी विकास सिंह के ठिकाने पर भी ईडी की एक टीम ने छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।  

एसटीएफ जुटा रही है संपत्तियों की जानकारी  

कफ सीरप सिंडिकेट में शामिल आरोपितों की संपत्तियों की भी जानकारी एसटीएफ जुटा रही है। बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह का राजधानी स्थित सुलतानपुर रोड पर करीब 10 हजार वर्ग फीट से बड़े आवास की कीमत आंकी जा रही है। इसके लिए सिविल इंजीनियरों की एक टीम लगाई गई है। यह टीम अमित टाटा और शुभम सहित अन्य आरोपितों की अचल संपत्तियों की सही कीमत की जानकारी एकत्र कर रही है।

ईडी के रडार पर 138 दवा फर्में, रियल एस्टेट व शराब कारोबारी भी फंसेंगे  

कफ सीरप की तस्करी के मुख्य सरगना शुभम जायसवाल की बहन को नोटिस रिसीव कराकर आठ दिसंबर को पूछताछ के लिए तलब किया गया है। इस कार्रवाई के बाद वाराणसी के 138 दवा कारोबारी भी ईडी की रडार पर हैं। शुभम दुबई भाग चुका है। ईडी मनी लांड्रिंग के आरोप में शुभम की संपत्तियां कुर्क करेगी। शुभम ने शराब, खनन और रियल एस्टेट में भी निवेश किया है, इसलिए जांच की आंच यूपी के बाद झारखंड व बंगाल तक पहुंचेगी।  

मनी लांड्रिंग का अनुमान दो हजार करोड़ रुपये का है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि शुभम और उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराएं बढ़ी हैं। शुभम को भगोड़ा साबित कराया जाएगा। शुभम और उसके साझेदार अमित टाटा का पैसा रियल एस्टेट में निवेश हुआ है। शराब, लाटरी के धंधे में भी दोनों रहा है।
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