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दिल्ली बम धमाके में बड़ा खुलासा: आतंकी उमर का क्‍लासमेट निकला डा. आरिफ, ब्‍लास्‍ट की प्‍लानिंग में था शामिल

cy520520 2025-11-14 11:37:24 views 1256
  

कार्डियोलाजी से पकड़ा गया था कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला डा. आरिफ। साभार सोशल मीडिया



गौरव दीक्षित, जागरण कानपुर। दिल्ली बम धमाके के बाद कार्डियोलाजी से पकड़े गए डा. आरिफ को लेकर बड़ी जानकारियां सामने आ रही हैं। वह बम धमाके में मारे गए आतंकी डा. उमर का सहपाठी रहा है। दोनों ने एक साथ एमबीबीएस किया था। यही नहीं पुलिस और जांच एजेंसियों की जांच में साबित हो गया है कि डा. आरिफ न केवल आतंकी नेटवर्क का हिस्सा था, बल्कि वह ऐसी गतिविधियों में भी पूरी तरह से लिप्त था। फरीदाबाद से लेकर दिल्ली बम धमाके से जुड़ी सभी गतिविधियों की योजना के सूत्रधारों में वह शामिल था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित खगुंड, सादीवारा, वेरीनाग निवासी मोहम्मद आरिफ मीर को एटीएस ने बुधवार देर शाम कार्डियोलाजी से हिरासत में लिया था। गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक (जीएसवीएम) मेडिकल कालेज की पूर्व प्रवक्ता डा. शाहीन के मोबाइल फोन से मिली जानकारी के बाद पुलिस उस तक पहुंची थी। गिरफ्तारी और जांच से जुड़ी एजेंसियों के एक अधिकारी के मुताबिक, डा. आरिफ के मोबाइल फोन से तमाम पुख्ता सुबूत मिल गए हैं। वह दिल्ली बम धमाके में मारे गए आतंकी डा. उमर का सहपाठी था। दोनों ने श्रीनगर मेडिकल कालेज से एक साथ एमबीबीएस किया था।

डा. आरिफ और डा. शाहीन वाट्सएप और अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के जरिए एक दूसरे के संपर्क में थे। जो चैट मिली हैं, उससे साफ है कि फरीदाबाद से दिल्ली बम धमाके तक हर आतंकी प्लानिंग में डाक्टर आरिफ शामिल था।

एजेंसियों ने डा. आरिफ की पिछले एक साल की मोबाइल सीडीआर (काल डिटेल रिपोर्ट) और लोकेशन भी निकलवाई है। इसमें पता चला है कि वह फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से भी जुड़ा हुआ था। वह वहां जाता था और लंबे समय तक रुकता था। माना जा रहा है कि अल फलाह में ही आतंकी साजिशों को अमलीजामा पहनाता था। यही नहीं आरिफ के मोबाइल से मददगारों की एक लंबी लिस्ट मिली है। इसमें कानपुर के कुछ ऐसे भी नाम हैं जो डा. शाहीन के सीधे संपर्क में थे। ऐसे में आशंका है कि डा. शाहीन ने स्थानीय मददगार के रूप में इन लोगों को डा. आरिफ से मिलवाया हो।
15 संदिग्ध कश्मीरी हिरासत में, हो रही पूछताछ

डा. आरिफ के पकड़े जाने के बाद जिस तरह के तथ्य सामने आए हैं, उससे कश्मीर के रहने वाले वर्ग विशेष के लोग शक के दायरे में हैं। एजेंसियों ने इस आधार पर कश्मीरी मूल के करीब 15 लोगों को पूछताछ के लिए उठाया है। हालांकि किसी भी स्तर से इसकी पुष्टि नहीं की जा रही है।

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