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मुस्लिम उम्मीदवारों ने बचाई ममता की लाज, टीए ...

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने इस बार 47 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था। वहीं कांग्रेस ने 70 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। वाम मोर्चा ने 29 और मौलाना पीरजादा अब्बास सिद्दीकी के इंडियन सेकुलर फ्रंट ने 24 मुस्लिमों को टिकट दिया था। हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) ने 90 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव मैदान में खड़े कर दिए। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से कुल 42 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।




2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में 44 मुस्लिम विधायक जीते थे। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 31 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। इनमें नाम मोहम्मद शमीम अहमद मोल्ला (मगराहाट पश्चिम) और सबिना यास्मिन हैं। पीरजादा नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) ने 1 सीट भांगड़ जीती। नौशाद सिद्दीकी ने टीएमसी के शौकत मोल्ला को 32088 वोटों से हराया। कांग्रेस ने 2 सीटें, हुमायूं कबीर की AJUP ने 2 सीटें और सीपीएम ने 1 सीट पर जीत दर्ज की।




ममता के 31 मुस्लिम विधायक (Bengal Election Result)

अमदंगा सीट- मोहम्मद सिद्दीकी- अरिंदम डे (बीजेपी) : 2995
बादुरिया सीट- बुरहानुल मुकद्दिम - सुकीर्ति कुमार(बीजेपी)  : 40061
बशीरहाट पश्चिम - तौसिफुर रहमान- मुसा करीमुल्ला (आईएसएफ)  : 57670
भगवानगोला - रेयात हुसैन सरकार - महमुदल हसन (सीपीएम)  : 56407
भरतपुर - मुस्तफिजुर रहमान - अनामिका घोष (बीजेपी)  : 30753
कनिंग पूर्बा - बहरुल इस्लाम - अराबुल इस्लाम (आईएसएफ)  : 91954




चाकुलिया - आजाद मिन्हाजुल - मनोज जैन (बीजेपी) 28011
छपरा - जबर शेख - सैकत सरकार (बीजेपी)  : 30780
चोपरा - हमीदुल रहमान - शंकर अधिकारी (बीजेपी)  : 69124
डेगंगा - अनीसुर रहमान - मोफिदुल हक (आईएसएफ)  : 17818
गोलपोखर - गुलाम रब्बानी- सराजीत बिस्वास  : 83790  
हनसन - फैयज हक- निखिल बनर्जी (बीजेपी)  : 28298
हरिहपारा - नियामत शेख- बिजय शेख (एयूजेपी) : 12665
हरिश्चंद्रपुर - मतीबुर रहमान -रतन दास (बीजेपी) : 48271




हरोरा - अब्दुल मतीन - पियारुल इस्लाम (आईएसएफ) : 49341
इताहर - मुशर्रफ हुसैन - सबिता बर्मन(बीजेपी) : 27878
जालंगी - बाबर अली - इयानुस अली (सीपीआई) : 21516
कालीगंज - अलीफा अहमद - बापन घोष (बीजेपी) : 10172
कस्बा - अहमद जावेद खान- बनर्जी संदीप (बीजेपी) : 20974
कोलकाता पोर्ट - फिरहाद हकीम : राकेश सिंह (बीजेपी) : 56080
लालगोला - अब्दुल अजीज -तोहिदुर रहमान (कांग्रेस) : 18960
मागराहाट वेस्ट - शमीम अहमद - गौरसुंदर (बीजेपी) : 58503

मेतियाबुरुज - अब्दुल खलीक - बीर बहादुर (बीजेपी) : 87879
मोथाबारी - इस्लाम नजरुल : निबारन घोष (बीजेपी) : 10496
मुराराई - मोशर्रफ हुसैन - संजीबुर रहमान (कांग्रेस) :  37705
पलाशीपारा - रुकबानपुर रहमान - अनीमा दत्ता (बीजेपी) : 11454
रघुनाथगंज - अखरुज्जमान - नासिर शेख (कांग्रेस) : 40555
शमशेरगंज - मोहम्मद नूर - नज्मे आलम (कांग्रेस) : 7587
शुजापुर - सबीना यास्मिन - अब्दुल हन्नान(कांग्रेस) : 60287
हुमायूं कबीर दोनों सीटों से जीते


नोवदा - हुमायूं कबीर (एयूजेपी) - राणा मंडल (बीजेपी) : 27943
रेजिनगर - हुमायूं कबीर(एयूजेपी) -बापन घोष (बीजेपी)  : 58876
कांग्रेस से 2 मुस्लिम जीते

रानीनगर - जुल्फिकार अली(कांग्रेस)- अब्दुल सौमिक (टीएमसी) : 2701
फरक्का - मोताब शेख - सुनील चौधरी (बीजेपी)  : 8193  
ISF और लेफ्ट का 1-1 मुसलमान विधायक

दोमकल - मोस्ताफिजुर रहमान(सीपीएम) - हुमायूं कबीर(टीएमसी)  : 16296
भांगड़ - नौशाद सिद्दीकी(आईएसएफ) - शौकत मोल्ला (टीएमसी)  : 32088

मुस्लिम वोटो का बंटना भाजपा को फायदा

बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत के पीछे मुस्लिम बहुल सीटों में बढ़त एक बड़ा कारण रही। खासकर मुर्शिदाबाद, मालदा और नॉर्थ दिनाजपुर जिलों में हिंदू वोट एकजुट हो गए और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का मुस्लिम वोट बैंक बंट गया। यह सब वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच हुआ। इस चुनाव में मुस्लिम वोट कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और कुछ हद तक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) में बंटते दिखे।

इन तीनों जिलों में अल्पसंख्यक आबादी 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा है। बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 43 सीटें मुर्शिदाबाद, मालदा और नॉर्थ दिनाजपुर में हैं। भाजपा, जिसने 2021 में इन 43 सीटों में सिर्फ 8 जीती थीं, इस बार 19 सीटें जीत गई यानी 11 सीटों का फायदा। वहीं टीएमसी, जो 2021 में 35 सीटें जीती थी, इस बार घटकर 22 पर आ गई। इसके अलावा मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और AJUP ने 2-2 सीटें जीतीं, जबकि सीपीआई(एम) को 1 सीट मिली।

कई राजनीतिक विश्लेषकों के अनुमान के उलट, SIR के दौरान करीब 91 लाख वोटर हटाए जाने के बावजूद मुस्लिम वोट टीएमसी के पीछे एकजुट नहीं हुए। बल्कि ये वोट ज्यादा तर कांग्रेस और सीपीआई(एम) में बंट गए। चुनाव आयोग के डेटा के विश्लेषण से यह बात सामने आई। कुछ सीटों पर हुमायूं कबीर की AJUP ने भी टीएमसी के मुस्लिम वोट में सेंध लगाई। वहीं इन जिलों की हिंदू बहुल सीटों पर हिंदू वोट भाजपा के पक्ष में एकजुट हो गए।
मुस्लिम आबादी वाले जिलों का प्रदर्शन


चुनाव आयोग के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिले की 22 सीटों में से भाजपा ने 9 सीटें जीतीं, जबकि 2021 में उसने सिर्फ 2 सीटें जीती थीं। 2011 की जनगणना के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी 66.3 प्रतिशत है।
2021 में टीएमसी ने यहां 20 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार यह घटकर 9 रह गई। SIR के दौरान जिले में करीब 4.55 लाख वोटर हटाए गए औसतन हर सीट से 20,668 वोटर कम हुए। इन हटाए गए वोटरों का असर टीएमसी के कुल वोट पर पड़ा और उसे नुकसान हुआ। मालदा में, जहां 39 लाख की आबादी में 51.3 प्रतिशत मुसलमान हैं भाजपा ने 12 में से 6 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी ने 8 सीटें जीतीं। 2021 में टीएमसी ने 8 और भाजपा ने 4 सीटें जीती थीं। मालदा में SIR के दौरान 2.39 लाख नाम हटाए गए। यानी हर सीट से औसतन 19,948 वोटर हटे।

उत्तरी दिनाजपुर में, जहां मुस्लिम आबादी 49.9 प्रतिशत है 9 में से 4 सीटें भाजपा को मिलीं और टीएमसी ने 5 सीटें जीतीं। 2021 में टीएमसी ने 7 और भाजपा ने 2 सीटें जीती थीं। उत्तरी दिनाजपुर में 1.76 लाख वोटर लिस्ट से हटाए गए। इसके अलावा साउथ 24 परगना और बीरभूम में भी भाजपा को बड़ा फायदा हुआ। 2011 की जनगणना के अनुसार इन जिलों में करीब 35 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। 2021 में टीएमसी ने इन दोनों जिलों में 40 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को सिर्फ 1 सीट मिली थी। इस बार आंकड़े भाजपा के पक्ष में काफी बदल गए हैं। साउथ 24 परगना की भांगर सीट पर भाजपा और टीएमसी के अलावा, ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट के एमडी नवसाद सिद्दीकी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इन पांच जिलों में मिलाकर राज्य की 85 सीटें आती हैं।






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