गुवाहाटी। Assam Vidhan Sabha Chunav Results 2026 : असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों (BJP+) ने निर्णायक बढ़त बना ली है। 126 सीटों वाली विधानसभा में BJP+ लगभग 99 सीटों पर आगे चल रही है, जो बहुमत के आंकड़े 64 से काफी ज्यादा है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन करीब 23 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है, जबकि अन्य के खाते में 1 सीट दिखाई दे रही है। इन रुझानों से साफ है कि राज्य में एक बार फिर भाजपा गठबंधन की सरकार बनती दिख रही है।
मुख्यमंत्री हिमंता सरमा अपनी सीट पर आगे
चुनाव आयोग के अनुसार, जालुकबारी विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा मजबूत स्थिति में हैं। उनके मुकाबले कांग्रेस की उम्मीदवार बिदिशा नियोग पीछे हैं। इस सीट पर सरमा की बढ़त से यह संकेत मिलता है कि व्यक्तिगत स्तर पर भी उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा है।
अन्य सीटों पर भी दिलचस्प मुकाबले
असम की बिन्नाकांडी सीट से एआईयूडीएफ के नेता बदरुद्दीन अजमल बढ़त बनाए हुए हैं। यह सीट हमेशा से राजनीतिक रूप से अहम मानी जाती रही है। वहीं जोरहाट विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार हितेंद्र नाथ गोस्वामी जीत गए हैं, जबकि कांग्रेस के गौरव गोगोई चुनाव हार गए हैं। इस सीट पर मुकाबला खासा चर्चित रहा है।
बीजेपी का बयान: ‘घुसपैठ के खिलाफ जीत’
असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया (या दिलीप) ने इन रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ भाजपा की नीति को जनता का समर्थन मिला है। उनका कहना है कि यह जीत विकास, हिंदुत्व और प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री हिमंता सरमा की नीतियों पर भरोसे का परिणाम है।
चुनावी मुद्दों ने तय की दिशा
इस बार के चुनाव में कई बड़े मुद्दे चर्चा में रहे। बांग्लादेशी घुसपैठ, NRC और CAA जैसे संवेदनशील विषयों के अलावा बाढ़, बेरोजगारी, चाय बागान मजदूरों की स्थिति और विकास भी प्रमुख मुद्दे रहे। राज्य और केंद्र के कई दिग्गज नेताओं ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने रैलियों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की।
महिला मतदाताओं ने बदली तस्वीर
इस चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की ‘अरुणोदय 2.0’ जैसी योजनाओं ने खास तौर पर ग्रामीण महिलाओं को प्रभावित किया। इन योजनाओं के तहत महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। चुनाव के करीब आते-आते इन योजनाओं का दायरा और बजट दोनों बढ़ा दिए गए, जिससे इसका असर और व्यापक हुआ। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने महिलाओं के बीच सरकार के प्रति भरोसा बढ़ाया और इसका सीधा फायदा BJP+ को मिला।
कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति
कांग्रेस ने इस चुनाव में महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया, लेकिन रुझानों से लगता है कि ये मुद्दे मतदाताओं को उतना प्रभावित नहीं कर पाए। पार्टी को ग्रामीण और महिला वोट बैंक में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, जिससे वह पीछे रह गई। मौजूदा रुझान कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का संकेत दे रहे हैं।
मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा
फिलहाल के रुझानों से साफ है कि असम में भाजपा गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत है और सरकार बनाना लगभग तय नजर आ रहा है। हालांकि अंतिम नतीजों का इंतजार अभी बाकी है, लेकिन शुरुआती संकेत यही बताते हैं कि राज्य की जनता ने एक बार फिर स्थिरता और मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा जताया है। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा असम में अपनी पकड़ और मजबूत करेगी।

Editorial Team
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