राजनीति के अध्येता देख रहे हैं कि कांग्रेस के ऊपर लंबे समय से उचित-अनुचित वार हो रहे हैं। नेहरू-गांधी परिवार पर वंशवाद का आरोप बार-बार लगाया जाता है। इस तथ्य को भुला दिया जाता है कि पंडित नेहरू के उत्तराधिकारी लाल बहादुर शास्त्री थे न कि इंदिरा गांधी। वे शास्त्रीजी के बाद अपने राजनैतिक कौशल से प्रधानमंत्री बनीं।
उनकी हत्या के बाद राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह का था। फिर राजीव गांधी चुनाव हार गए और वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री बने। जब कांग्रेस सत्ता में लौटी तो राजीव गांधी की भी हत्या हो चुकी थी तथा नरसिम्हाराव प्रधानमंत्री बने। इस दौरान सोनिया गांधी सात वर्ष राजनीति से बिल्कुल दूर रहीं।
गौर कीजिए कि 1989 से अभी तक याने पिछले सत्ताइस सालों से गांधी परिवार का कोई सदस्य न तो मंत्री है न प्रधानमंत्री।
(देशबन्धु में 02 जून 2016 को प्रकाशित)
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