Gold Price Prediction: गोल्ड पर किसने दिया अब तक का सबसे बड़ा टारगेट प्राइस, ₹2.40 लाख के पार चला जाएगा सोना?
नई दिल्ली| सोना अब लंबी अवधि की बड़ी तेजी में प्रवेश कर चुका है और वैश्विक बाजार में कीमतें 5000 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई हैं। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेस लिमिटेड (MOFSL) की ताजा \“प्रेशियस मेटल्स क्वार्टरली रिपोर्ट\“ में यह बड़ा दावा किया गया है।
गोल्ड की नई सुपर-साइकिल शुरू
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में सोने ने 5000 डॉलर प्रति औंस (भारतीय करेंसी में करीब 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) का स्तर पार कर लिया, जो आधुनिक इतिहास के सबसे मजबूत बुल फेज में से एक माना जा रहा है।
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि यह सिर्फ सामान्य तेजी नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल री-प्राइसिंग फेज है, यानी एक नई सुपर-साइकिल शुरू हो चुकी है।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि, अगले 12 महीनों में COMEX गोल्ड 6,000 डॉलर प्रति औंस ( gold price forecast) तक जा सकता है। भारतीय बाजार में इसका मतलब करीब 1.85 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम हो सकता है।
अगर भू-राजनीतिक तनाव और राजकोषीय दबाव और बढ़े, तो मीडियम टर्म में सोना 7,500 डॉलर प्रति औंस (gold target price) (भारतीय करेंसी में करीब 2.40 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) तक भी पहुंच सकता है।
डॉलर आधारित एसेट्स से दूरी
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेस लिमिटेड के हेड ऑफ रिसर्च (कमोडिटीज) नवनीत दमानी के मुताबिक,
दुनिया धीरे-धीरे डॉलर आधारित एसेट्स से दूरी बना रही है। ग्लोबल रिजर्व में विविधता आ रही है और फिजिकल सप्लाई सीमित है, जिससे सोने को 5000 डॉलर के आसपास और उससे ऊपर मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। उनका कहना है कि यह तेजी सिर्फ महंगाई की वजह से नहीं, बल्कि सरकारों की वित्तीय और मौद्रिक नीतियों पर भरोसे में कमी के कारण है।
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आखिर क्यों चढ़ता रहा सोना?
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023 से 2025 के बीच रियल इंटरेस्ट रेट पॉजिटिव रहने के बावजूद सोना चढ़ता रहा, जबकि आमतौर पर ऐसे दौर में कीमतें गिरती हैं। इससे साफ है कि निवेशक बढ़ते ग्लोबल कर्ज और आर्थिक अस्थिरता को लेकर चिंतित हैं।
एशिया, पूर्वी यूरोप और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, ट्रेड वॉर और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता ने भी सोने की मांग बढ़ाई है। सीमित खनन उत्पादन, एक्सचेंजों पर घटते स्टॉक और बढ़ती लागत ने सप्लाई को टाइट रखा है।
Gold ETF में बढ़ा निवेश
भारत में रुपए की कमजोरी और मजबूत रिटेल खरीदारी ने मांग को सहारा दिया है। गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में भी कई साल बाद दोबारा निवेश बढ़ा है।
वहीं, केंद्रीय बैंक लगातार चौथे साल करीब 1,000 टन सोना हर साल खरीद रहे हैं, ताकि डॉलर पर निर्भरता घटाई जा सके। रिपोर्ट का साफ संकेत है कि ग्लोबल अनिश्चितता और सीमित सप्लाई के बीच सोने की लंबी अवधि की कहानी अभी मजबूत बनी हुई है।  |