संवाद सूत्र, बाराबंकी। फरवरी माह में ही मई जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। 10 दिनों से लगातार तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। तपिश बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। रफी अहमद स्मारक जिला चिकित्सालय पुरुष में गुरुवार को 1354 मरीजों का पंजीकरण हुआ। अस्पताल खुलते ही मरीजों की लंबी कतार पर्चा काउंटर के सामने लग गई।
अस्पताल में बुखार, सिरदर्द व उल्टी दस्त के मरीजों की संख्या अधिक हैं। ट्रामा सेंटर में 38 मरीज भर्ती किए गए। अधिकांश मरीज उल्टी दस्त व बुखार और बदन दर्द से पीड़ित रहे। 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर में भी 431 मरीजों ने पंजीकरण कराया। जिला महिला अस्पताल में 516 मरीज ओपीडी में पहुंचे। वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. राजेश कुशवाहा ने बताया कि मौसम में बदलाव होने से लोगों को सचेत रहने की जरूरत हैं। खान-पान में संयम बरतें और तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें।
बाल रोग विभाग की ओपीडी में बच्चों की संख्या अधिक रहीं। बाल रोग परामर्शदाता डॉ. बीएम मौर्य ने बताया कि बदलते मौसम का असर बच्चों में साफ देखा जा रहा है। एक सप्ताह से उल्टी दस्त व बुखार से पीड़ित अधिक बच्चे आ रहे हैं। सुबह शाम ठंडी व दिन में तेज धूप से बच्चों को लेकर फिक्रमंद रहने की जरूरत है।
गेहूं और दलहनी फसलों पर असर
तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है। खेतों में गेहूं, सरसों, चना और मसूर की फसलें बढ़वार और दाना बनने की अवस्था में हैं। उपकृषि निदेशक धीरेंद्र सिंह ने बताया कि यदि इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो गेहूं की फसल में दाना भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अधिक तापमान से दाने हल्के रह जाते हैं, जिससे उत्पादन घटने की आशंका रहती है। सरसों की फसल में भी समय से पहले फूल झड़ने और दाना सिकुड़ने का खतरा बढ़ा है। चना और मसूर जैसी दलहनी फसलों पर भी गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।  |
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