जागरण संवाददाता, मेरठ। पहले शहर और आसपास के क्षेत्रों से पढ़ने आने वाले छात्रों और नौकरीपेशा युवाओं को रोजाना यात्रा में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सड़कों पर लगने वाला लंबा जाम, समय पर आटो या बस न मिलना और देर से पहुंचने की चिंता आम बात थी।
खासकर छात्रों को स्कूल-कालेज पहुंचने के लिए घर से एक घंटा या उससे भी पहले निकलना पड़ता था, फिर भी समय पर पहुंचना तय नहीं होता था। अब यह बीते दिनों की बात हुई। दिल्ली, गाजियाबाद के लिए तय समय पर घर से निकलते हैं, नमो भारत ट्रेन पकड़ते हैं, मिनटों में मंजिल तक पहुंच जाते है।
यही बदलाव मेरठ के अंदर आया है। छात्रों और नौकरीपेशा युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी बदल गई है। छात्रों का कहना है कि पहले यात्रा चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन अब नमो भारत और मेट्रो सेवा ने सफर को आसान बना दिया है।
तेज और सुगम परिवहन सुविधा से न केवल समय बच रहा है, बल्कि दिनचर्या बेहतर हुई है। पहले दिल्ली रोड के जाम और आटो की अनिश्चितता के कारण मानसिक तनाव बना रहता था, लेकिन अब मेट्रो से समय पर आना-जाना आसान हो गया है।
मैं गंगानगर से हूं शहीद भगत सिंह इंटर कालेज में पढ़ता हूं। पहले बेगमपुल तक 30 से 40 रुपये लगते थे। रोज आटो से जाना पड़ता था और रास्ते में भीड़ बहुत रहती थी। समय पर पहुंचने के लिए जल्दी निकलना मजबूरी थी। अब मेट्रो से यात्रा करने पर आराम मिलता है। इससे समय की बचत होती है और खर्च भी कम हुआ है।
-विकास कुमार
मैं नोएडा में जाब करती हूं, नोएडा पहुंचने में देर हो जाया करती थी। अब मात्र 40 मिनट में मेरठ से वहां पहुंच जाती हूं। पहले मेरठ साउथ उतरना पडता था अब सीधा बेगमपुल पहुंच रही हूं। रात में आटो वाले पैसे भी ज्यादा लेते थे। ऑनलाइन टिकट बुक करती हूं। इसका मूल्य भी तय होता है। बहुत सारी परेशानियों से छुटकारा मिला। मेट्रो शुरू होने के बाद यात्रा सरल हो गई है। अब समय भी बचता है और पैसे भी।
-तन्वी
मैं दिल्ली से हूं। पहले मेरठ आने में मुझे काफी समय लग जाता था। जब से नमो भारत ट्रेन शुरू हुई है, तब से यात्रा बहुत आसान हो गई है। अब मैं मात्र 216 रुपये में केवल 45 मिनट में मेरठ पहुंच जाती हूं। मेट्रो से मेरठ आना-जाना भी सरल हो गया है। इससे मुझे बहुत राहत मिली है और मेरा खर्च भी कम हो गया है।
-तृप्ता
मैं परतापुर से हूं, बाजार घूमने आई हूं। पहले मेरा अधिक समय यात्रा में ही निकल जाता था। आटो से जाना महंगा भी पड़ता था। आने-जाने के करीब 80 रुपये लगते थे अब 60 रुपये में पहुंच रही हूं। सड़क पर जाम लगने से मन परेशान रहता था। मेट्रो से जाने पर सफर तेज और सुरक्षित हो गया है। इससे रोज का समय सही तरह से उपयोग हो पाता है।
-माजिया
मैं मोदीपुरम की रहने वाली हूं और नोएडा में नौकरी करती हूं। पहले आने-जाने में लगभग 200 रुपये खर्च हो जाते थे और समय भी ज्यादा लगता था। अब मैं मोदीपुरम से गाजियाबाद सिर्फ 90 रुपये में और करीब 40 मिनट में पहुंच जाती हूं। पहले की तुलना में अब न सिर्फ समय बच रहा है, बल्कि यात्रा भी कहीं ज्यादा सुविधाजनक और सीधी हो गई है।
-बीना  |
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