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बनभूलपुरा अतिक्रमण: रेलवे भूमि पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, 2027 के विधानसभा चुनावों पर दिखेगा असर

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पिछले कई चुनावों तक कांग्रेस के लिए बड़ा वोट बैंक माना गया है यह क्षेत्र



जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी का बनभूलपुरा क्षेत्र हमेशा से ही राजनीति का केंद्र रहा है। यहां पर शुरुआत में व्यापारिक गतिविधियां भी संचालित होती थी। धीरे-धीरे क्षेत्र की आबादी बढ़ते रही और अब यह जिले की सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र बन गया है।

आलम यह रहा कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन की भूमि में भी लोग बसते रहे। इन्हें तब अतिक्रमण करने से रोका नहीं गया।क्योंकि इसके पीछे राजनीतिक हित थे। इनके वोट बैंक से किसी को पार्षद बनना था तो किसी को विधायक।यही कारण रहा कि अवैध तरीके से बसने के बावजूद सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती रहीं। सत्ता का दुरुपयोग होता रहा। राजनीति संरक्षण की आड़ लेकर बसे लोगों ने आशियाने भी खड़े कर लिए।
31 हेक्टयेर में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण का मामला

अब बनभूलपुरा के 31 हेक्टयेर में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण का मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। 5236 परिवारों वाले इस क्षेत्र में करीब 50 हजार की आबादी है। अनुमान है कि 15 हजार से अधिक वोटर इसी क्षेत्र में हो सकते हैं। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलाने के लिए प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है। ऐसे में सबसे पहले यह देखना होगा कि इसमें कितने पात्र होंगे।

साथ ही इनके लिए हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में इतनी जमीन भी नहीं है कि एक जगह बसाया जा सके। ऐसे में जब यह अलग-अलग जगहों पर जाएंगे तो क्षेत्र का एकमुश्त वोट बैंक प्रभावित हो जाएगा। अभी तक माना गया कि यह वोट कांग्रेस के पाले में ही गया। यह इलाका हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र में हैं।

इसमें कांग्रेस की कद्दावर नेता डा. इंदिरा हृदयेश ने जीत हासिल की है। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में इंदिरा हृदयेश के बेटे सुमित हृदयेश ने जीत हासिल की है। हालांकि शहर का मेयर पिछले तीन कार्यकाल से भाजपा का ही जीत रहा है। अगर इसी वर्ष अतिक्रमण हटता है तो इस सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम क्या रहेगा, फिलहाल अटकलें ही लगाई जा सकती हैं।
लोगों पूछ रहे हैं, इन्हें बसाने वाले पर कब होगी कार्रवाई?

ऐसा नहीं कि रेलवे भूमि में अचानक लोग बस गए। यह बसासत धीरे-धीरे हुई, जिसमें राजनीतिक संरक्षण के साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी हुई हैं।रेलवे की भूमि होने के बावजूद इन्हें बिजली, पानी कनेक्शन दे दिए गए। राशन कार्ड, आधार कार्ड से लेकर स्थायी निवास प्रमाण पत्र तक बना डाले।सरकारी धन से सड़कें, स्कूल व अस्पताल तक बना दिए गए। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि इसके लिए तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए।

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