19वीं एसएसबी बटालियन मुख्यालय ठाकुरगंज का मुख्य द्वार।
संवाद सूत्र, ठाकुरगंज (किशनगंज)। भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सीमावर्ती क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से प्रस्तावित एसएसबी 19वीं बटालियन मुख्यालय का निर्माण लंबे समय से लंबित है। ठाकुरगंज प्रखंड के चुरली पंचायत स्थित एनएच-327 ई के समीप 30 एकड़ भूमि अधिग्रहित होने के छह साल बीतने के बाद भी आधारभूत संरचना का काम शुरू नहीं हो पाया है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के किशनगंज दौरे को इस परियोजना को गति देने का संकेत माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन ने फरवरी 2020 में चुरली पंचायत के मौजा गोथरा एवं चुरली में माणिक चंद अग्रवाल की 30 एकड़ भूमि अधिग्रहित कर एसएसबी को हस्तांतरित कर दी थी। भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया 14 नवंबर 2019 को पूरी की गई और तत्कालीन कमांडेंट मितुल कुमार को भूमि सौंप दी गई। सीमांकन, मोटेशन, मृदा परीक्षण, डिजिटल सर्वे और सीपीडब्ल्यूडी द्वारा ले-आउट रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया।
वर्तमान में 19वीं बटालियन किराए के भवन में संचालित हो रही है। प्रस्तावित स्थायी परिसर में प्रशासनिक भवन, जवानों के आवासीय भवन, शस्त्रागार, पार्किंग, खेलकूद और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। मुख्यालय बनने से जवानों को बेहतर संसाधन उपलब्ध होंगे और सीमा सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।
स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य शुरू होता है तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की आधारभूत संरचना को नई दिशा मिलेगी। इसके अलावा, सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और नागरिक सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार संभव होगा।
अमित शाह का दौरा और सुरक्षा व्यवस्था
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर किशनगंज, अररिया और पूर्णिया के लिए बुधवार को पूर्णिया पहुंचे। वे 4.20 बजे वायुसेना के विशेष विमान से सैन्य हवाई अड्डा पहुंचे और 10 मिनट बाद हेलीकॉप्टर से किशनगंज के लिए रवाना हुए। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए बिहार सरकार के कई मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इसमें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद सिंह, उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री सम्राट चौधरी, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों की मंत्री लेशी सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी शामिल थे।
इस अवसर पर जिला प्रशासनिक अधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम, एसपी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे। उनके दौरे के दौरान एअरपोर्ट और सीमावर्ती इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया और खुफिया विभाग भी सक्रिय है। इसके अलावा, पैदल यात्रियों के लिए अलग रूट तय किया गया है ताकि किसी प्रकार की संदिग्ध स्थिति से निपटा जा सके।
सीमांचल में सुरक्षा और सामरिक महत्व
सीमांचल और उत्तर बिहार के सीमावर्ती जिलों में तेजी से बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप और घुसपैठ केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय हैं। भारत-नेपाल की करीब 700 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा, उसके प्रबंधन और संभावित अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए अमित शाह उच्चाधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक करेंगे।
इस दौरान सीमा प्रबंधन, निगरानी तंत्र, खुफिया समन्वय और बिना दस्तावेज सीमा पार होने वाले व्यक्तियों पर अंकुश लगाने के उपायों पर चर्चा होगी। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा सेना और केंद्र एवं राज्य के आधे दर्जन से अधिक विभागीय अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि अमित शाह इस दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सीमांचल दौरे में सुरक्षा और राजनीतिक रणनीति दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण संदेश छिपा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और उम्मीद
स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि मानते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री का दौरा लंबित एसएसबी मुख्यालय निर्माण को गति दे सकता है। यह परियोजना न केवल जवानों के लिए बेहतर संसाधन मुहैया कराएगी, बल्कि स्थानीय व्यवसाय, रोजगार और क्षेत्र की समग्र विकास योजनाओं को भी बढ़ावा देगी।
सामरिक दृष्टि से यह मुख्यालय सीमा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इससे न केवल तस्करी, हथियार और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा, बल्कि घुसपैठ पर भी कारगर नियंत्रण संभव होगा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की सक्रियता इस दिशा में पहले से ही नजर आ रही है।
सीमांचल के लोग केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे से बड़ी उम्मीद लगाए हुए हैं कि लंबे समय से लंबित एसएसबी मुख्यालय का सपना साकार होगा और क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और रोजगार के अवसरों का नया अध्याय शुरू होगा।  |
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