हरियाणा में मौसम के बदलने से बढ़ी किसानों की चिंता। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, हांसी। फरवरी माह के मध्य में कुदरत के बदलते तेवरों ने क्षेत्र के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। 14 फरवरी के आसपास पारे में आई अचानक तेजी और मौसम वैज्ञानिकों द्वारा आगामी दिनों में वर्षा की संभावना जताए जाने से किसान सशंकित हैं। गेहूं और सरसों की फसल इस समय अपनी सबसे महत्वपूर्ण अवस्था में है, ऐसे में मौसम का यह दोहरा प्रहार उत्पादन पर भारी पड़ सकता है।
फसलों पर संकट: कहीं गर्मी तो कहीं बारिश का खौफ
वर्तमान में गेहूं की फसल में दाना बनने और सरसों में फूल व फली आने की प्रक्रिया चल रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवस्था में हल्की ठंड और संतुलित तापमान संजीवनी का काम करता है। हालांकि, तापमान में अचानक बढ़ोतरी से दाना सिकुड़ने का खतरा बढ़ गया है। वहीं, दूसरी ओर यदि आने वाले दिनों में तेज हवा के साथ बारिश होती है, तो खड़ी फसल गिरने और दाने काले पड़ने की आशंका है।
आर्थिक बोझ और पिछले घावों का डर
क्षेत्र का किसान पिछले एक साल से कुदरत की मार झेल रहा है। पिछले वर्ष कपास, बाजरा और धान की फसलें बाढ़ की भेंट चढ़ गई थीं, जिससे किसान पहले ही भारी आर्थिक दबाव में हैं। अब रबी की मुख्य फसलों पर संकट देख किसान बेबस महसूस कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत के बीच यदि मौसम ने साथ नहीं दिया, तो इस बार भी नुकसान की भरपाई करना नामुमकिन हो जाएगा।
क्यों बढ़ी चिंता, क्या होगा असर?
दाना भराव प्रभावित: अधिक गर्मी से गेहूं का दाना समय से पहले पक सकता है, जिससे वह छोटा और हल्का रह जाएगा।
रोगों का खतरा: वर्षा के कारण नमी बढ़ने से पत्तियों पर पीला रतुआ और अन्य फफूंद जनित रोगों के फैलने की संभावना रहती है।
फसल का गिरना: तेज हवा और बारिश से सरसों और गेहूं की फसल खेत में बिछ सकती है, जिससे कटाई में दिक्कत और पैदावार में भारी कमी आती है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह और सावधानियां
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था रखें।
जरूरत पड़ने पर ही हल्की सिंचाई करें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और गर्मी का प्रभाव कम हो।
फसल की नियमित निगरानी करें और कीट या बीमारी के लक्षण दिखते ही विशेषज्ञों से संपर्क करें।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर ही कीटनाशकों के छिड़काव या सिंचाई का निर्णय लें।
वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं किसान
एसडीओ रविंद्र कुमार ने कहा कि किसान घबराने के बजाय धैर्य से काम लें और वैज्ञानिक पद्धतियों को प्राथमिकता दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि तापमान बढ़ने की स्थिति में हल्की सिंचाई फसल को राहत दे सकती है, लेकिन वर्षा की संभावना को देखते हुए खेतों में पानी जमा न होने दें। कृषि विभाग की टीमें फील्ड में सक्रिय हैं और किसानों को लगातार परामर्श दिया जा रहा है। |