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देवरिया-भटनी-छपरा समेत इन दस रूटों पर अवैध वेंडरों का कब्जा, IRCTC ने मांगी GRP से मदद

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जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के देवरिया-भटनी-छपरा और खलीलाबाद-गोण्डा-बाराबंकी समेत दस रेलमार्गों रूटों पर अवैध वेंडरों का कब्जा है। अवैध वेंडर स्टेशन ही नहीं ट्रेनों में भी खुलेआम खानपान की सामग्री बेच रहे हैं। गोरखपुर के अलावा बिहार के विभिन्न स्टेशनों से बनकर चलने वाली ट्रेनों में बासी समोसा, पकौड़ी, छोला-चावल और लिट्टी व चना बेच रहे हैं।

सुबह की बनी चाय, रात तक बेचते हैं। खानपान के नाम पर बीमारी बांटने के साथ मुंहमांगा कीमत भी वसूल रहे हैं। लोकल अनधिकृत पानी की बोतलों का भी 20 रुपये वसूल रहे हैं। भूखे-प्यासे यात्री वेंडरों की पहचान नहीं कर पा रहे और छले जा रहे हैं।  

इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (आइआरसीटीसी) ने अवैध वेंडरों वाले पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख दस रेलमार्गों (रूटों) की पहचान की है। अवैध वेंडिंग की समस्या से जूझ रहे आइआसीटीसी ने राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) से सहयोग मांगा है। इसके लिए आइआरसीटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अजित कुमार सिन्हा ने जीआरपी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) डी प्रकाश से मुलाकात की है।

मुलाकात के दौरान क्षेत्रीय प्रबंधक ने एडीजी से वेंडरों को दी जाने वाली सुविधाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही रेलवे में खानपान सेवाओं को सुचारु प्रबंधन में जीआरपी का सहयोग मांगा। आइआरसीटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक ने एडीजी को बताया कि पूर्वोत्तर रेलवे के कुछ रेलवे सेक्शनों में खान पान सेवा प्रदाताओं को अनधिकृत वेंडर्स की समस्या से जूझना पड़ रहा है।

इन रेलखंडो में प्रयागराज-फूलपुर, प्रयागराज-वाराणसी, बनारस- भदोही, वाराणसी-रायबरेली, झांसी-उरई-कानपुर, झांसी-ललितपुर, इटावा-टुंडला, देवरिया-भटनी-छपरा, खलीलाबाद-गोण्डा-बाराबंकी, हरदोई-शाहजहांपुर-बरेली रेल खंड शामिल हैं। उन्होंने इन रेल खंडों पर जीआरपी के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाने पर जोर दिया।

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उन्होंने बताया कि कैटरिंग सर्विस के लाइसेंसी टीम के सदस्यों के लिए खास वर्दी का निर्धारण किया है। वर्दी पर सेवा प्रदाता का मोबाइल फोन नंबर और उनका नाम स्पष्ट अक्षरों में अंकित रहता है। इसके अतिरिक्त सभी अधिकृत वेंडर्स को स्पेशल क्यूआर कोड वाले आइडी कार्ड (परिचय पत्र) भी उपलब्ध कराए गए हैं। ताकि, यात्रियों और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) स्टाफ को सही वेंडर्स की पहचान हो सके।

पहचान वाली रूटों पर लगभग 300 मेल एक्सप्रेस ट्रेन गुजरती है। प्रायः मुख्य ट्रेनों में जीआरपी की एस्कॉर्ट सुविधा यात्रियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध रहती है। जानकारों का कहना है कि गर्मी ने भी दस्तक दे दी है। इसके साथ ही स्टेशनों और ट्रेनों में पानी की अवैध वेंडिंग शुरू हो गई है।

वेंडर रेल नीर और अधिकृत ब्रांड वाली पानी की बोतलों की जगह लोकल ब्रांड वाली अनधिकृत पानी की बोतलें बेच रहे हैं। लोकल पानी की बोतलें 20 रुपये में बेच रहे हैं। जबकि, रेल नीर और अधिकृत ब्रांड वाली पानी की बाेतलें 14 रुपये में ही बिकती हैं।   
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