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गोरखपुर में बदलेगा जमीन-मकान का सर्किल रेट, 2026 से लागू होंगे नए नियम

deltin33 2 hour(s) ago views 384
  

स्टाम्प शुल्क गणना में आएगी पारदर्शिता। सांकेतिक तस्वीर  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। जिले में अब जमीन और मकान की कीमत तय करने का तरीका बदलने जा रहा है। महानिरीक्षक निबंधन ओर से जारी निर्देशों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश की तरह गोरखपुर में भी सर्किल दर सूची मानकीकृत प्रविधानों और निर्धारित प्रारूप पर लागू की जाएगी।

इस संबंध में डीएम को तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की ओर से प्रारूप भेजा गया है। इसी के आधार पर जिले से दरों का निर्धारण कर प्रकाशन कराया जाएगा और आपत्ति मांगी जाएगी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद इसे लागू किया जाएगा। गोरखपुर में 2016 से नया सर्किल रेट नहीं लागू हो सका है। हर साल अन्य जिलों की तरह नई दरें निर्धारित तो की गई, लेकिन वह अमल में नहीं आ सकीं।  

इस निर्णय का उद्देश्य संपत्ति पंजीकरण के समय लगने वाले स्टाम्प शुल्क की गणना में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है। अभी तक अलग-अलग जिलों में मूल्यांकन की पद्धति में भिन्नता देखने को मिलती थी, जिसे अब समाप्त किया जा रहा है।

नए प्रविधानों के तहत यदि किसी भूखंड की चौहद्दी में एक से अधिक पक्की सड़क होगी, तो अधिक दर वाली सड़क के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा और कुल कीमत में 15 प्रतिशत अतिरिक्त वृद्धि की जाएगी।

यदि किसी वाणिज्यिक, आवासीय या औद्योगिक भूखंड के सामने पार्क स्थित है, तो 10 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्य जोड़ा जाएगा। वहीं यदि भूखंड के सामने पार्क भी हो और एक से अधिक सड़क भी, तो 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त मूल्य वृद्धि लागू होगी।

सड़क की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है। डामरीकृत, सीसी, इंटरलाकिंग, खड़ंजा या अन्य पक्के मार्ग को ही सड़क माना जाएगा। कच्चा चकमार्ग सड़क की श्रेणी में शामिल नहीं होगा। सड़क की चौड़ाई नालियों सहित मापी जाएगी।

कृषि भूमि के लिए भी तय हुआ नया फार्मूला
कृषि भूमि के मूल्यांकन के लिए भी अलग-अलग श्रेणियों में स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। सेगमेंट रोड (चिन्हित मुख्य मार्ग) पर स्थित भूमि के लिए 0.050 हेक्टेयर (या ग्रामीण क्षेत्र में 0.030 हेक्टेयर) तक निर्धारित दर के ‘के’, ‘एल’, ‘एम’, ‘एन’ गुणा के आधार पर मूल्यांकन होगा। इससे अधिक भूमि पर अतिरिक्त वृद्धि सामान्य निर्देशों के अनुसार जोड़ी जाएगी।

सेगमेंट रोड से भिन्न सड़क पर स्थित भूमि के लिए ‘के1’, ‘एल1’, ‘एम1’ गुणांक लागू होंगे, जिन्हें जनपद स्तर पर तय किया जाएगा। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि यदि स्थानीय परिस्थितियों के कारण मानक प्रारूप से किसी प्रकार का बदलाव आवश्यक हो, तो जिलाधिकारी और सहायक महानिरीक्षक निबंधन संयुक्त आख्या प्रस्तुत करेंगे। अंतिम निर्णय महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय द्वारा लिया जाएगा।

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श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है कृषि भूमि का सर्किल रेट
प्रदेश में रजिस्ट्री के समय कृषि भूमि के सर्किल रेट (सरकारी दर) को मुख्य रूप से के, एल, एम, एन जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। ये श्रेणियां जमीन का स्थान , सड़क से दूरी, और उपयोग के आधार पर तय की जाती हैं।

के (क) श्रेणी की भूमि आमतौर पर सबसे ऊंची दर वाली कृषि भूमि होती है। यह मुख्य मार्ग के किनारे, हाई-वे या शहरी क्षेत्र के बहुत करीब स्थित होती है, इसलिए इनकी कीमत सबसे ज्यादा होती है। एल (ख) श्रेणी की भूमि \“के\“ श्रेणी से थोड़ा कम प्रमुख सड़क या पक्की सड़क के पास होती है। इसकी दर के श्रेणी से कम लेकिन एम व एन से अधिक होती है।

इसी तरह एम(ग) श्रेणी अर्ध-विकसित या आंतरिक सड़कों के पास की जमीन के लिए होती है। यह पक्की सड़क से थोड़ी दूर हो सकती है, लेकिन मुख्य मार्ग से जुड़ी होती है। वहीं एन (घ) श्रेणी की भूमि सबसे कम दर वाली कृषि भूमि होती है। यह आमतौर पर रास्ते या कच्ची सड़क से जुड़ी होती है, या गांव के मुख्य पक्के मार्ग से काफी दूर होती है।   
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