आशीष सिंह, धनबाद। नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद अब शहरवासियों की निगाहें परिणाम पर टिक गई हैं। 27 और 28 फरवरी को मतगणना के बाद धनबाद की नई नगर सरकार का चेहरा स्पष्ट हो जाएगा। मेयर और पार्षद पद के परिणाम घोषित होने के साथ ही नगर निगम में लगभग छह वर्षों बाद नए बोर्ड का गठन होगा। इसके बाद नवनिर्वाचित पार्षदों द्वारा डिप्टी मेयर का चयन किया जाएगा।
लंबे अंतराल के बाद बनने जा रहे नगर निगम बोर्ड से शहर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। नागरिक बेहतर सफाई व्यवस्था, सुचारु पेयजल आपूर्ति, सड़क मरम्मत, जलनिकासी और शहरी विकास से जुड़े लंबित कार्यों में तेजी की अपेक्षा कर रहे हैं। चुनाव के दौरान भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था।
इसी बीच नगर निगम जनप्रतिनिधियों के मानदेय को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। बहुत कम लोगों को जानकारी है कि सांसद, विधायक और पंचायत प्रतिनिधियों की तरह नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों को भी मासिक मानदेय दिया जाता है।
कितनी मिलती है सैलरी?
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार मेयर को 10 हजार रुपये, डिप्टी मेयर को 10 हजार रुपये और पार्षदों को सात हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इसके अलावा मेयर और डिप्टी मेयर को नगर निगम की ओर से आवागमन के लिए वाहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
हालांकि, पिछली नगर निगम बोर्ड बैठक में मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव भी लाया गया था। उस बैठक में मेयर और डिप्टी मेयर का मानदेय बढ़ाकर 15 हजार रुपये तथा पार्षदों का मानदेय 10 हजार रुपये प्रतिमाह करने पर चर्चा हुई थी।
इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर नगर विकास विभाग को अनुमोदन के लिए भेजा गया था, लेकिन विभागीय स्वीकृति नहीं मिल सकी। इसी बीच नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो गया और प्रस्ताव लंबित ही रह गया।
धनबाद नगर निगम के पूर्व पार्षदों का कहना है कि वर्तमान मानदेय जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों के अनुपात में काफी कम है। उनका तर्क है कि नगर निगम के एक सफाई कर्मी का मासिक वेतन 12 से 14 हजार रुपये तक है, जबकि पार्षद, डिप्टी मेयर और मेयर का मानदेय इससे भी कम है। कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों ने इसे न्यूनतम वेतन अधिनियम के नियमों के उल्लंघन भी बताया है।  |