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जम्मू बाल सुधार गृह कांड: सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई गई, लेकिन बाहरी सुरक्षा व्यवस्था में अब भी गंभीर खामियां

Chikheang 1 hour(s) ago views 466
  

सुधार गृह के बाहर मोर्चा बनाकर अतिरिक्त जवान तैनात करने की योजना अधूरी।



दलजीत सिंह, आरएसपुरा। बाल सुधार गृह में हुई गोलीबारी और पुलिस कर्मियों पर हमले की सनसनीखेज घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

एक ओर जहां फरारी, विदेश से कथित फंडिंग और वाई-फाई के जरिए रची गई साजिश की जांच जारी है, वहीं दूसरी तरफ सुधार गृह की अंदरूनी और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था में अब भी गंभीर खामियां बनी हुई हैं। घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो सभी सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह लागू हुए हैं और न ही मुख्य आरोपी कर्णजीत सिंह उर्फ ‘गुग्गा’ पुलिस की पकड़ में आ पाया है।

मिली जानकारी के अनुसार, बाल सुधार गृह में सुरक्षा बलों की संख्या जरूर बढ़ाई गई है। पहले जहां केवल छह पुलिस जवान तैनात थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़ाकर दस कर दी गई है। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभी तक अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं। योजना के तहत सुधार गृह के बाहर मोर्चा बनाकर अतिरिक्त जवान तैनात किए जाने थे, लेकिन वह व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो सकी है। ऐसे में बाहरी निगरानी को लेकर लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
सुधार गृह में इस समय करीब 22 बंदी

सुधार गृह की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो वहां इस समय करीब 22 बंदी हैं, जिनमें से सात बालिग हो चुके हैं। नियमों के अनुसार बालिग होने के बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अन्य जेल अथवा उपयुक्त निरुद्ध केंद्र में स्थानांतरित किया जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया गया है। यह तथ्य भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि बालिग बंदियों को नाबालिगों के साथ ही रखा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया दोनों पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

दूसरी ओर, गोलीबारी कांड के मुख्य आरोपी कर्णजीत सिंह उर्फ ‘गुग्गा’ की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी नागरिकों से पूछताछ में फरारी की साजिश, मोबाइल और नकदी की व्यवस्था, तथा बाहर से कथित फंडिंग जैसे कई पहलुओं का खुलासा हुआ था। जांच एजेंसियां डिजिटल संपर्क, आर्थिक लेन-देन और संभावित सीमापार कनेक्शन की बारीकी से जांच कर रही हैं, लेकिन मास्टरमाइंड का फरार रहना पुलिस की चुनौती बना हुआ है।
सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी

घटना के बाद से सीमावर्ती इलाकों और पंजाब की ओर जाने वाले मार्गों पर नाकेबंदी बढ़ाई गई है, परंतु स्थानीय स्तर पर लोगों का मानना है कि स्थायी और मजबूत सुरक्षा ढांचे के बिना ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। बाल सुधार गृह जैसी संवेदनशील संस्था में सुरक्षा, निगरानी और कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन बेहद जरूरी माना जा रहा है।

अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन न केवल फरार आरोपी को कब तक पकड़ पाता है, बल्कि सुधार गृह की व्यवस्था में पाई गई खामियों को दूर करने के लिए ठोस और स्थायी कदम कब उठाए जाते हैं। फिलहाल यह मामला सुरक्षा तंत्र, कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक जवाबदेही तीनों की कसौटी बनता जा रहा है।   
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