जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मौसम में बदलाव की वजह से कफ दोष बढ़ता है। इससे सर्दी-जुकाम, खासी, एलर्जी, त्वचा विकार और पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती है। ऐसे मौसम में सावधानी बरत कर ही समस्या से बचा जा सकता है।
महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद चिकित्सक डाक्टर रमाकांत द्विवेदी ने बताया कि कफ दोष की वृद्धि के कारण होली में खान-पान और रंग खेलने में सतर्कता से ही बीमारियों से बचा जा सकता है।
आयुष विश्वविद्यालय के ओपीडी में प्रतिदिन चिकित्सकों के पास कफ दोष से पीड़ित 60 से 70 राेगी पहुंच रहे हैं। डाक्टर रमाकांत द्विवेदी ने बताया कि होली के बाद इनकी संख्या में वृद्धि होती है। कफ बढ़ने पर शरीर में भारीपन, आलस्य, नाक बंद होना और गले में कफ जमने के लक्षण दिखाई पड़ते हैं।
वह बताते हैं कि तापमान में उतार- चढ़ाव के कारण समस्या आती है। इस अवस्था में तले-भुने, अत्यधिक मीठे और मसालेदार पदार्थों का अधिक सेवन रोग बढ़ाता है। ऐसे संतुलित आहार लेना चाहिए और गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए।
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चिकित्सक ने बताया कि रासायनिक रंगों के संपर्क से त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ जाती है, जो कफ प्रकृति वाले व्यक्तियों में एलर्जी और दाने उत्पन्न कर सकती है। इसलिए प्राकृतिक पुष्पों, पत्तियों और हल्दी जैसे पदार्थों से बने रंगों का उपयोग करना अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सुबह गुनगुना पानी पीना, हल्का व्यायाम करना और पर्याप्त विश्राम लेना कफ संतुलन में सहायक होता है। साथ ही यदि किसी को लगातार खांसी, जुकाम या त्वचा में जलन जैसी समस्या होने पर चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए।  |