search

महाबोधि कॉरिडोर पर मंथन के बीच बड़ा झटका: बैठक के बाद मंत्री प्रतिनिधि की मौत से बढ़ी संवेदनशीलता

deltin33 1 hour(s) ago views 969
  

महाबोधि कॉरिडोर पर मंथन के बीच बड़ा झटका



संवाद सूत्र, बोधगया, गयाजी। बोधगया में आयोजित बोधगया मंदिर सलाहकार बोर्ड की बैठक में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन सबसे बड़ा मुद्दा रहा। महाबोधि मंदिर, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, उसकी पवित्रता बनाए रखने पर जोर दिया गया। कॉरिडोर योजना को लेकर सदस्यों ने साफ किया कि किसी भी निर्माण से विरासत मानकों से समझौता नहीं होगा। बैठक में 25 सदस्यीय बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हुए। कई बौद्ध देशों के राजनयिकों ने भी अपनी राय रखी। विकास की रफ्तार से पहले विरासत संरक्षण को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया।
500 मीटर दायरे में निर्माण पर चर्चा

यूनेस्को के दिशा-निर्देशों के तहत मंदिर परिसर के 500 मीटर के भीतर निर्माण गतिविधियों पर सख्ती है। दो किलोमीटर के दायरे में भवनों की ऊंचाई को लेकर भी प्रतिबंध लागू हैं।

कॉरिडोर योजना इन्हीं शर्तों के भीतर आगे बढ़े, इस पर विचार-विमर्श हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का मुद्दा उठाया।

मंदिर प्रबंधन समिति को निगरानी मजबूत करने का सुझाव दिया गया। संतुलित विकास मॉडल पर सहमति बनाने की कोशिश दिखी।
बैठक के तुरंत बाद दुखद घटना

बैठक समाप्त होने के कुछ ही देर बाद एक दुखद खबर सामने आई। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के प्रतिनिधि मार्कंडेय प्रसाद चंद्रवंशी की हृदयगति रुकने से मौत हो गई।

बताया गया कि वे होटल परिसर में ही अचानक गिर पड़े। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

इस घटना ने बैठक की गंभीरता के बीच शोक का माहौल बना दिया। उपस्थित सदस्यों और अधिकारियों में स्तब्धता फैल गई।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी ने बढ़ाया महत्व

बैठक में थाईलैंड, म्यांमार, जापान, कंबोडिया, लाओस और श्रीलंका जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। इससे स्पष्ट है कि महाबोधि मंदिर का मुद्दा केवल स्थानीय नहीं, वैश्विक महत्व का है।

विदेशी प्रतिनिधियों ने संरक्षण मानकों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया। बोधगया की अंतरराष्ट्रीय छवि को ध्यान में रखकर फैसले लेने की बात कही गई।

राजनयिक स्तर पर समन्वय और पारदर्शिता बढ़ाने का सुझाव दिया गया। बैठक ने यह संकेत दिया कि विकास की हर योजना वैश्विक नजरों में है।
संरक्षण बनाम विकास की चुनौती

महाबोधि मंदिर परिसर में हर बदलाव संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय लोगों की सुविधाएं और पर्यटन प्रबंधन भी अहम मुद्दा है। कॉरिडोर योजना से भीड़ नियंत्रण और सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।

लेकिन विरासत स्थल की मूल संरचना से छेड़छाड़ पर कड़ी आपत्ति जताई गई। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि दोनों पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़े।बैठक के बाद हुई घटना ने पूरे मसले को और भी भावनात्मक और संवेदनशील बना दिया।   
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
476013