थराली के कुलसारी कालिका देवी मंदिर परिसर में नंदादेवी राजजात यात्रा को 2027 में आयोजित को लेकर बधाणक्षेत्र के जनप्रतिनिधि भाग लेते हुए।
संवाद सहयोगी, कर्णप्रयाग (चमोली)। कुलसारी कालिका देवी मंदिर परिसर में नंदा देवी राजजात-2027 के आयोजन को लेकर प्रमुख समितियों की सोमवार को हुई बैठक में केंद्रीय समन्वय समिति का गठन किया गया। इसकी जिम्मेदारी सुशील रावत को सौंपी गई।
बैठक में देवराड़ा में आयोजित राजजात आयोजन में पारित प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई और राजजात वर्ष 2027 में आयोजित करने के प्रस्तावों का ध्वनिमत से अनुमोदन किया गया।
कहा गया कि परंपरा के अनुसार शासन-प्रशासन से मिले दिशा-निर्देशों के आधार पर ही हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात का आयोजन होगा।
कुलसारी पड़ाव समिति के अध्यक्ष गोविन्द सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बधाण क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों और पड़ाव समिति के पदाधिकारियों ने राजजात आयोजन से पूर्व पैदल मोटर मार्गों सहित बुनियादी सुविधाओं को समय रहते जुटाने की मांग की।
पड़ाव समिति के पदाधिकारियों ने कुरुड़, चरबंग, उस्तौली, सेंती, डुंग्री, सूना आदि क्षेत्रों को राजजात मार्ग के तहत विकसित कर नक्शे में शामिल करने की बात रखी।
देवराड़ा समिति, कुरुड़, बधाणगढ़ी व नंदकेसरी समिति ने नंदा देवी राजजात समिति की ओर से तैयार प्रस्तावों के आधार पर 2027 में ही राजजात आयोजित करने की बात रखी।
बैठक में पहुंचे बड़ी जात आयोजन समिति कुरुड़ के अध्यक्ष कर्नल (सेनि) हरेन्द्र सिंह ने अपना पक्ष रखने की मांग की।
बैठक में इस समिति को बुलाने पर बधाण क्षेत्र की पड़ाव समिति और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि जब देवराड़ा में आयोजित बैठक में बड़ी जात आयोजित करने को लेकर गठित समिति को भंग कर दिया गया था तो ऐसे में इन पदाधिकारियों के बोलने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
इस पर दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों में जमकर बहस हुई। इस पर माहौल को शांत करते हुए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सुशील रावत ने बड़ी जात आयोजन समिति कुरुड़ के अध्यक्ष कर्नल (सेनि) हरेन्द्र सिंह से विचार रखने को कहा।
हरेन्द्र सिंह ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन विधि-विधान से हो, इसमें कोई अड़चन न आए, इसके लिए उनकी मांग है कि राजजात समिति और शासन के अधिकारियों की मौजूदगी में वार्तालाप हो, लेकिन उनकी इस मांग पर बैठक में हंगामा हो गया।
पड़ाव समिति के अध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि पूर्व में ही बड़ी जात आयोजन समिति को देवराड़ा समिति की बैठक में भंग कर दिया गया था। ऐसे में इस बैठक में ऐसी कोई भी मांग नहीं मानी जाएगी।
इसके बाद दोनों पक्षों के मध्य बढ़ती बहस को शांत कराते हुए निर्णय लिया गया कि राजजात का आयोजन 2027 में ही होगा और इसके लिए केंद्रीय समन्वय समिति का गठन कर पदाधिकारियों को दायित्व सौंपा गया।
केंद्रीय समन्वय समिति में सुशील रावत को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई, जबकि डीडी कुनियाल, भुवन हटवाल, नंदन सिंह रावत को समिति में जिम्मेदारी दी गई।
इस मौके पर पड़ाव समिति के पदाधिकारी महावीर सिंह ने फल्दिया गांव में पैदल रास्तों की मरम्मत समय रहते करने, कुंवर सिंह ने थराली आपदा के बाद पुलों की मरम्मत, यात्रा के वापसी वाले रास्तों को ठीक करने, कुरुड़, देवराड़ा, चरबंग, उस्तौली, सेंती, भेंटी, डुंग्री, सूना को राजजात के समान विकसित कर यात्रा में शामिल करने की मांग रखी।
बैठक में भुवन देवराड़ा समिति के भुवन हटवाल, डीडी कुनियाल, सुशील रावत, पृथ्वी सिंह, बिजेन्द्र सिंह, मंशाराम गौड़, नरेश गौड़, हरीश सती सहित बधाणगढ़ी, देवराड़ा, कुरुड़, नंदकेसरी, चेपड़ों, मुंदोली, वाण और बधाणगढ़ी क्षेत्र के 200 से अधिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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