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राज्य स्तरीय नारको समन्वय केंद्र की हुई बैठक। (जागरण)
राज्य ब्यूरो, पटना। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय नारको समन्वय केंद्र की 9वीं शीर्ष स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक का उद्देश्य राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध खेती और दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करना था।
बैठक की शुरुआत में गृह विभाग ने राज्य में मादक पदार्थों की वर्तमान स्थिति तथा पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की विस्तृत जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि राज्य स्तर पर यह बैठक प्रत्येक तीन माह पर तथा जिला स्तर पर प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि बैठकों की कार्यवाही और प्रतिवेदन को समय पर पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करें।
पहली जुलाई 2024 को आयोजित पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की समीक्षा भी की गई। अवैध अफीम और गांजा की खेती की पहचान तथा समय पर नष्ट करने के लिए उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के उपयोग पर बल दिया गया।
इसके लिए भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान और उन्नत डाटा प्रसंस्करण अनुसंधान संस्थान से प्राप्त जानकारी का उपयोग किया जाएगा।
बैठक में मादक पदार्थ नियंत्रण से जुड़ी राज्य स्तरीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता वृद्धि पर भी जोर दिया गया, ताकि संगठित गिरोहों की पहचान और गिरफ्तारी प्रभावी ढंग से की जा सके।
नशामुक्ति के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने हेतु प्रमुख आध्यात्मिक संगठनों के साथ समझौता कर व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
नशामुक्ति केंद्र के प्रभावी संचालन पर बल
कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए राज्य में विशेष मादक पदार्थ निरोधक न्यायालयों की स्थापना और विचारण न्यायालयों में वीडियो माध्यम से साक्ष्य प्रस्तुत करने की व्यवस्था सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। साथ ही जिला स्तर पर नशामुक्ति, पुनर्वास और परामर्श केंद्रों की स्थापना तथा उनके प्रभावी संचालन पर बल दिया गया।
नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो कार्यालय की सुरक्षा के लिए बिहार पुलिस के जवानों की तैनाती सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।
बैठक के समापन पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने दोहराया कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों के कारोबार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए नीतिगत समन्वय और जमीनी स्तर पर सभी संबंधित पक्षों का सक्रिय सहयोग अनिवार्य है। |
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