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भागलपुर के स्कूलों में डिजिटल क्रांति: 305 स्मार्ट क्लास तैयार, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता जांचेगी ADRI टीम

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भागलपुर में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की पहल: स्मार्ट क्लास और एमडीएम मूल्यांकन साथ-साथ



जागरण संवाददाता, भागलपुर। नए शैक्षणिक सत्र में जिले के विद्यार्थियों को पढ़ाई का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिलेगा। योजना एवं बजट 2025-26 के तहत सूचना एवं संचार तकनीक और डिजिटल पहल के अंतर्गत 305 माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, प्रारंभिक तथा कस्तूरबा विद्यालयों में स्मार्ट क्लास तैयार किए जा रहे हैं। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार इंस्टॉलेशन का कार्य अंतिम चरण में है और मार्च तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
किन-किन विद्यालयों में बनेंगी स्मार्ट क्लास

योजना के तहत 248 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में दो-दो स्मार्ट क्लास स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 32 प्रारंभिक विद्यालयों और 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक-एक स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे हैं। इस परियोजना का जिम्मा रेलटेल एजेंसी को दिया गया है।
तकनीकी मूल्यांकन के बाद होगा संचालन

इंस्टॉलेशन कार्य पूरा होने के बाद विभाग की तकनीकी टीम विद्यालयों का निरीक्षण कर मूल्यांकन रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर स्मार्ट क्लास का संचालन शुरू किया जाएगा। डीपीओ (एसएसए) बबीता कुमारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रधानाध्यापकों की देखरेख में उपयुक्त कक्ष का चयन कर उपकरणों की स्थापना सुनिश्चित की जाए और इसकी रिपोर्ट जिला कार्यालय को भेजी जाए।
डिजिटल पढ़ाई से बढ़ेगी गुणवत्ता

शिक्षा विभाग का मानना है कि स्मार्ट क्लास से पढ़ाई अधिक रोचक और प्रभावी बनेगी। ऑडियो-विजुअल माध्यम से पढ़ाए जाने पर विद्यार्थियों की समझ बेहतर होगी और उनकी सीखने की क्षमता में वृद्धि होगी। इससे सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
एमडीएम की स्वतंत्र जांच होगी

इधर, भागलपुर और बांका जिले सहित राज्य के सरकारी विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी। भागलपुर के 1789 से अधिक प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में यह योजना संचालित है।
एडीआरआई करेगी मूल्यांकन

राज्य स्तर पर हुए समझौते के तहत एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एडीआरआई) की टीम केंद्रीकृत रसोइयों और चयनित विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता का आकलन करेगी। जिले में कई स्थानों पर एनजीओ के माध्यम से केंद्रीकृत किचन संचालित हैं, जहां से विद्यालयों तक भोजन पहुंचाया जाता है।
रिपोर्ट कार्ड के आधार पर होगी कार्रवाई

जांच के दौरान भोजन की गुणवत्ता, पोषण स्तर, स्वच्छता, भंडारण व्यवस्था और वितरण प्रणाली की समीक्षा की जाएगी। प्रत्येक रसोई का रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा, जिसमें प्रदर्शन के आधार पर श्रेणी तय की जाएगी। शिक्षकों और विद्यार्थियों से भी फीडबैक लिया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि किस एनजीओ का अनुबंध बढ़ाया जाए, किसे सुधार का निर्देश दिया जाए और कहां सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
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