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अतंरिक्ष में लहराएगा AMU का परचम: लांच करेगा अपना पहला उपग्रह, बताएगा शहरों की समृद्धि

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एएमयू विज्ञानियों द्वारा तैयार किया गया नैनो सेटेलाइट  



संतोष शर्मा, जागरण अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विद्यालय (एएमयू) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ा कीर्तिमान स्थापित करने जा रही है। यूनिवर्सिटी के छात्र, शिक्षक और पूर्व छात्रों ने स्टार्टअप के तहत पहला नैनो उपग्रह तैयार किया है। इसरो की मदद से इसे जून में श्री हरिकोटा लांचिंग पैड से लांच किया जाएगा। काम अंतिम दौर में हैं।

विश्वविद्यालय का यह पहला मिशन है। छात्रों द्वारा डिजाइन किए गए साढ़े चार किलो वजनी उपग्रह को पृथ्वी की निम्न कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया जाएगा। उपग्रह से शहर व राज्यों का आर्थिक ग्रोथ सर्वे किया जा सकेगा। आसमान से कम साइज की तस्वीर अच्छी गुणवत्ता की भेजी जा सकेंगी।

परियोजना को एसएस एएमयू सैट नाम दिया गया है। शुरुआत नवंबर 2021 में हुई थी। यह एक अंतः विषयक परियोजना है, जिसमें यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के संकाय सदस्यों, छात्रों व पूर्व छात्रों के अलावा इसरो के अंतरिक्ष विज्ञानियों की भी मदद ली जा रही है।

एएमयू छात्रों ने स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए सभी उपग्रह उप-प्रणालियों को आंतरिक रूप से और अंतरिक्ष योग्यता मानकों के अनुसार विकसित किया है। यह एक थ्रीयू क्यूबसैट है, जो लगभग 30×10×10 सेमी और लगभग 4.5 किलोग्राम वजन का होगा। परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आइएन-स्पेस) द्वारा अनुमोदित किया गया है।

एएमयू और आईएन-स्पेस के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं। यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर व एएमयू इनोवेशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. सैयद फहद अनवर के अनुसार परियोजना का उद्देश्य एक अभूतपूर्व अल्ट्रा इमेज संपीड़न तकनीक का प्रदर्शन करना और रात्रि प्रकाश पर आर्थिक विकास के प्रभाव का अध्ययन करना है।

उपग्रह से शहरों की रात में तस्वीर ली जाएगी। तस्वीर से अध्ययन किया जाएगा कि लाइट की कितनी बढ़ रही है। बिजली खपत कितनी हो रही है। इससे उनकी संपन्नता का पता चल सकेगा। यूनिवर्सिटी के विद्युत, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, यांत्रिक इंजीनियरिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) के विशेषज्ञों की टीम ने इस पर काम किया है।

आसमान में मेक इन इंडिया का लहराएगा पताका

एएमयू विज्ञानियों ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है जो फोटो को कंप्रेस करता है। 12 एमबी की फोटो को 80 गुणा तक कंप्रेस कर 150 केवी तक किया जा सकता है। इससे फोटो की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं आएगी। उपग्रह को पृथ्वी से 500 किमी दूर पर ला अर्थ आर्बिट में स्थापित किया जाएगा। उपग्रह पूरी तरह मेक इन इंडिया की थीम पर विकसित किया जा रहा है। ट्रैकर, एंटीना, चार कैमरे, रेडियो और बैट्री सब भारत में बनाए गए हैं। सोलर पैनल ही यूरोप से मंगाया गया है।  

ये हैं परियोजना में शामिल

परियोजना में एएमयू के भौतिक विज्ञान विभाग के चेयरमैन व एएमयू इनोवेशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. मोहम्मद सज्जाद अथर, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर व आईटीबीआई के नोडल समन्वयक प्रो. इकराम खान, यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर व एएमयू इनोवेशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. सैयद फहद अनवर, पेट्रोलियम अध्ययन विभाग के डा. सैयद जावेद अहमद रिजवी और एएमयू एएमयूआईएफ के इनक्यूबेशन मैनेजर मोहम्मद तबिश आदि इसमें शामिल हैं।



एएमयू के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि हमारे युवा शोधकर्ताओं की प्रतिभा अब अंतरिक्ष की ओर अग्रसर है। श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होने वाला यह नैनो-प्रौद्योगिकी उपग्रह हमारी नवाचार-परंपरा और वैज्ञानिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह उपलब्धि भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अनेक नई प्रेरणाएं देने वाली सिद्ध होगी।
   
                                                                               प्रो. नईमा खातून, कुलपति एएमयू
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