दुर्गावती नदी पर पुल का इंतजार
संवाद सूत्र, रामपुर। स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के सबारगढ़ में मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत दुर्गावती नदी पर बनने वाला करीब 7 करोड़ 72 लाख रुपये की लागत का पुल अब तक सिर्फ कागजों और बोर्ड तक सीमित है।
प्राक्कलन बोर्ड लगाकर और मिट्टी जांच कराकर विभाग ने अपनी औपचारिकता पूरी कर ली, लेकिन जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
लोगों का कहना है कि यह योजना कहीं घोषणा और शिलान्यास की राजनीति में तो नहीं फंस गई। प्राक्कलन बोर्ड के अनुसार पुल की लंबाई 111.6 मीटर और पहुंच पथ 280 मीटर प्रस्तावित है। निर्माण कार्य ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा कराया जाना है।
23 सितंबर 2025 से निर्माण शुरू
बोर्ड पर 23 सितंबर 2025 से निर्माण शुरू होने की तिथि अंकित है। इसके बावजूद महीनों बाद भी स्थल पर न मशीनें पहुंचीं, न सामग्री, न मजदूर। दो माह पहले बोर्ड लगाकर उम्मीद जगाई गई थी, लेकिन अब तक एक ईंट भी नहीं रखी गई।
सवाल उठ रहा है कि जब तिथि घोषित कर दी गई थी, तो काम क्यों नहीं शुरू हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक मिट्टी जांच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। विभागीय स्तर पर भरोसा दिलाया गया था कि रिपोर्ट आते ही जनवरी से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। अब फरवरी समाप्ति की ओर है और स्थिति जस की तस हैं।
रिपोर्ट, समीक्षा और प्रक्रिया का हवाला
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग हर बार रिपोर्ट, समीक्षा और प्रक्रिया का हवाला देकर समय टाल रहा है। यदि समय रहते काम शुरू कर दिया जाता तो इस वर्ष बरसात के मौसम में राहत मिलती। दुर्गावती नदी कैमूर जिला और रोहतास जिला के बीच है।
वर्तमान में आवागमन के लिए अस्थायी छलका पुल ही एकमात्र सहारा है, जिसे तीन-चार वर्ष पूर्व जिला परिषद मद से बनाया गया था। अब उसकी स्थिति जर्जर हो चुकी है।
बरसात के दिनों में यह पुल डूब जाता है और दोनों जिलों के बीच संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मरीजों, छात्रों और किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
भभुआ विधायक ने चुनाव से करीब डेढ़ माह पहले पुल का शिलान्यास किया था। चुनाव समाप्त होते ही स्थल पर प्राक्कलन बोर्ड लगा दिया गया, लेकिन उसके बाद से सन्नाटा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी मौसम में जनता को सपने दिखाए गए, लेकिन अब जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठा है।- धर्मेंद्र कुमार
छात्र-छात्राओं को कोचिंग के लिए चेनारी जाने में लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। यदि पुल बन जाए तो यह दूरी घटकर एक-दो किलोमीटर रह जाएगी। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को होती है, जिन्हें लंबा और असुरक्षित रास्ता तय करना पड़ता है।- रिंकी कुमारी
गर्मी और जाड़े में लोग किसी तरह छलका पुल से गुजर जाते हैं, लेकिन बरसात में रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। हमने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। पुल बनने से लोगों को बहुत लाभ होगा।- राजगृही कोहार
प्राक्कलन बोर्ड लगाया जा चुका है और मिट्टी जांच पूरी हो चुकी है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।- भरत बिंद, विधायक
डीपीआर की जांच और समीक्षा चल रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।- सुजीत कुमार सुमन, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग |