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बांकेबिहारी मंदिर में उमड़ी भारी भीड़: बच्चों और महिलाओं की निकली चीख, अंदर रेलिंग पर बाहर धक्का-मुक्की से बिगड़े हालात

Chikheang 1 hour(s) ago views 49
  

दर्शन के लिए उमड़ी भीड।



संवाद सहयोगी, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में स्टील की रेलिंग तो लगा दी गई, लेकिन अभी भी अव्यवस्थाएं कम नहीं हो रही हैं। शनिवार को दर्शन को भीड़ उमड़ी, ऐसे में सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। मंदिर के बाहर गली में भीड़ से हालात ऐसे हो गए कि श्रद्धालु ठीक से खड़े भी नहीं पाए। धक्का-मुक्की के बीच श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
बांकेबिहारी मंदिर में शनिवार को उमड़ी भीड़, होल्डिंग बैरियर पर रोककर दर्शन को भेजे श्रद्धालु

मंदिर परिसर के बड़े हिस्से में रेलिंग लगने से अंदर दर्शन अपेक्षाकृत सुगम जरूर हुए, लेकिन प्रवेश द्वार, होल्डिंग एरिया और गेट नंबर दो-तीन से रेलिंग तक पहुंचने के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही। मंदिर आंगन में उतरने के लिए बने स्लैब से ही रेलिंग शुरू होती है। इससे पहले का क्षेत्र बिना नियंत्रित कतार का होने से भीड़ का दबाव अचानक बढ़ जाता है।  
बच्चों और महिलाओं की निकली चीख, व्हीलचेयर पर दिव्यांग भी परेशान

बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भीड़ में दब गए। कई जगह चीख-पुकार की स्थिति बनी। भीड़ बढ़ने पर जगह-जगह होल्डिंग एरिया सख्त कर दिए गए। रस्से लगाकर श्रद्धालुओं को रोका गया और धीरे-धीरे आगे बढ़ाया गया। जैसे ही छोड़ने का संकेत मिलता, आगे बढ़ने की कोशिश में भीड़ का दबाव बढ़ जाता। भीड़ अधिक होने के कारण व्हीलचेयर लेकर आए श्रद्धालुओं को रास्ता नहीं मिला।

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रेलिंग के अंदर तो दर्शन ठीक हुए, लेकिन गेट से अंदर आने तक के रास्ते में बहुत धक्का-मुक्की हुई। मेरे साथ मेरी बुजुर्ग मां थीं, जिन्हें काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा। -रिम्पल मिगलानी, लुधियाना

पत्नी को व्हीलचेयर पर लेकर आए हैं। लेकिन भीड़ में रास्ता नहीं मिला। कोई अलग लाइन या सहायता नहीं थी, जिससे काफी परेशानी उठानी पड़ी। बुजुर्गों को सहूलियत मिलनी चाहिए। -रसिक लाल, मुंबई

होल्डिंग एरिया में बच्चे घबरा गए। छोड़ते समय अचानक भीड़ तेज हुई, जिससे डर और अव्यवस्था का माहौल बन गया। जबकि मैं दिल की मरीज थी, इसीलिए हालत खराब हो गई। -निर्मला देवी, अमृतसर

मंदिर के अंदर व्यवस्था बेहतर दिखी, लेकिन बाहर से प्रवेश तक स्थिति अब भी खराब रही और काफी धक्का-मुक्की झेलनी पड़ी। बुजुर्ग, मरीज और दिव्यांगों के लिए व्यवस्थाएं होनी चाहिएं। -उर्मिला, कानपुर

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