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प्रतीकात्मक चित्र
संवाद सहयोगी, चंदौसी (संभल)। किशोरी से छेड़खानी और जातिसूचक शब्दों का उपयोग करने वाले दोषी को न्यायालय ने तीन साल के कारावास और बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 13 अप्रैल साल 2019 को गांव के ही शीलू पर बेटी से छेड़खानी और जातिसूचक शब्दों का उपयोग करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस को बताया कि पत्नी रिश्तेदारी में गई थी, जबकि वह दुकान पर थे। उनकी 14 वर्षीय बेटी घर पर अकेली थी।
शाम के समय आरोपित शीलू घर में पहुंच गया और उसने किशाेरी को अकेला पाकर छेड़खानी शुरू कर दी। शोर मचाने पर आरोपित मौके से भाग गया। जब पत्नी घर वापस लौटी, तब बेटी ने अपने साथ घटित पूरा वाकया मां को बताया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर छेड़खानी और एससी एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर आरोपित को जेल भेज दिया।
साथ ही न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि इस मुकदमे के सुनवाई विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह की न्यायालय में हुई। शनिवार को न्यायालय ने आरोपित शीलू को दोषी करार दिया।
उसे तीन वर्ष के कारावास और बीस हजार के जुर्माने से दंडित किया। मानिटरिंग सेल के प्रभारी राजाराम ने बताया कि इस मुकदमे में दोषी को सजा दिलाने में कोर्ट पैरोकार राहुल कुमार शर्मा और कोर्ट मोहर्रिर विनोद कुमार राठी की विशेष भूमिका रही है।
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