द्वारका हादसे के नाबालिग आरोपित की पहचान बताने पर रोक। फोटो: आर्काइव
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। द्वारका में हाल ही में हुए एसयूवी दुर्घटना में 17 साल के नाबालिग आरोपित की पहचान उजागर करने से रोक दिया है। मीडिया संस्थानों पर रोक लगाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि प्रेस की आजादी पर रोक नहीं लगाई जा सकती, लेकिन नाबालिग की पहचान सुरक्षित होनी चाहिए।
द्वारका सड़क दुर्घटना में एक 23 साल के साहिल की जान चली गई थी। आरोपित की पहचान उजागर करने पर रोक लगाने की मांग काे लेकर उसके पिता द्वारा दायर याचिका पर अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों को मामले में हुई प्राथमिकी में नाबालिग आरोपित की जानकारी देने से अगली सुनवाई तक रोक लगाई जाती है।
आरोपित के पिता ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा-77 के तहत बेटे की पहचान बताने पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही मीडिया को मीडिया ट्रायल चलाने का हवाला देते हुए मामले की रिपोर्टिंग करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की।
पिता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि सभी न्यूज चैनल और प्रकाशक न सिर्फ नाबालिग का चेहरा दिखा रहे थे, बल्कि उसका नाम और पहचान सहित अन्य जानकारी बताई जा रही हैं। इससे परिवार को खतरा है।
पीठ ने कहा कि पत्रकारिता और प्रेस की आजादी पर रोक नहीं लगाई जा सकती। साथ ही सवाल किया कि किस नियम के तहत मीडिया को रोका जा सकता है? अदालत ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो कहता हो कि पत्रकारिता और प्रेस के अधिकार पर रोक लगाई जानी चाहिए।
पिता के वकील ने कहा कि उनकी मुख्य शिकायत जेजे एक्ट की धारा-74 के अनुपालन को लेकर है। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि हालांकि उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो वह स्टेटस रिपोर्ट फाइल करेंगे।
इस पर पीठ ने अगली सुनवाई तक आरोपित की पहचान उजागर करने पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। अदालत ने याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर सुनवाई नौ जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
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