ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ आदेश से नाराज जज ने भारत को लेकर क्या कहा?
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी जज ब्रेट कैवना ने अपने एक फैसले में भारत पर लगाए गए टैरिफ का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने रूस और यूक्रेन के बीच झगड़े को खत्म करने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। यह टैरिफ 6 अगस्त, 2025 को लगाया गया था और 6 फरवरी, 2026 को इसे घटा दिया गया क्योंकि भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने का वादा किया था।
फैसले से असहमति जताने वाले जज ब्रेट कैवना ने रूसी तेल खरीद के लिए भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा, “सरकार का कहना है कि टैरिफ ने कुछ विदेशी बाजारों को अमेरिकी बिजनेस के लिए अधिक आसान बनाने में मदद की है और विभिन्न देशों के साथ खरबों डालर की ट्रेड डील में योगदान दिया है।
रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने के लिए लगा टैरिफ
इसके अलावा इतिहास और टैरिफ के पारंपरिक इस्तेमाल के हिसाब से राष्ट्रपति रूस व यूक्रेन के बीच झगड़े को खत्म करने के लिए बहुत संवेदनशील बातचीत के सिलसिले में अपने आइईईपीए अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसी मकसद से छह अगस्त, 2025 को राष्ट्रपति ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल खरीद के लिए भारत पर टैरिफ लगाया। छह फरवरी, 2026 को भारत पर टैरिफ घटा दिया क्योंकि सरकार के मुताबिक, भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने का वादा किया था।“
छोटे बिजनेस को जल्द मिले रिफंड
एपी के अनुसार, 800 से अधिक छोटे बिजनेस के एक ग्रुप \“वी पेद टैरिफ्स\“ ने कहा, टैरिफ वापस करने प्रक्रिया जरूरी है। ग्रुप के कार्यकारी निदेशक डैन एंथनी ने एक बयान में कहा, “जिन बिजनेस ने ये टैरिफ अदा किए हैं, उन्हें असली राहत मिले बिना कानूनी जीत का कोई मतलब नहीं है।
प्रशासन का अब एकमात्र जिम्मेदार तरीका एक तेज, कुशल और आटोमैटिक रिफंड प्रोसेस बनाना है जो टैरिफ का पैसा उन बिजनेस को लौटा दे जिन्होंने इसे चुकाया है।“
राष्ट्रपति कब लगा सकते हैं टैरिफ
राष्ट्रपति के पास कांग्रेस की बिना स्वीकृति के अन्य अधिकार हैं, लेकिन उनमें से हर एक के साथ समयसीमा जैसी शर्तें जुड़ी हैं, जिससे ट्रंप के लिए अपनी रणनीति को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर एक कानून का प्रविधान राष्ट्रपति को टैरिफ बढ़ाने की इजाजत देता है, लेकिन अधिकतम 150 दिनों के लिए सिर्फ 15 प्रतिशत तक।
राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से भी अधिक टैरिफ लगाने का अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ खास उद्योगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है और इसके लिए वाणिज्य विभाग की जांच भी आवश्यक है। |