संवाद सूत्र, जागरण लखीमपुर। दुधवा नेशनल पार्क के बफरजोन में बाघ, तेंदुओं के बढ़ते मूवमेंट और शिकार की घटनाएं ने भले ही आम लोगों को डरा रही हो, लेकिन वन विभाग की बदली रणनीति काफी हद तक वन्यजीवों को पिंजरे में कैद करने में सहायक हो रही है।
15 दिन में एक बाघ, चार तेंदुए पिंजरे में फंस गए हैं। इन सभी को पकड़ने के बाद आबादी से दूर जंगलों में छोड़ा जा रहा है। आक्रामक होकर हमला कर रहे इन बाघ-तेंदुओं के पकड़े जाने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी थमी हैं।
बफरजोन में तेंदुओं की आबादी पिछले तीन वर्षों में लगभग ढाई गुना बढ़ी है। वन्यजीव गणना 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में बफरजोन में 93 तेंदुए पाए गए थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 275 हो गए हैं। खेतों में छिपे ये तेंदुए गन्ने की छिलाई के दौरान बाहर निकल रहे हैं। तेंदुए बच्चों और मवेशियों को निशाना बना रहे हैं।
बफरजाेन प्रशासन तेंदुओं पर शिकंजा कसने के लिए पुरानी तरकीबों के आगे बढ़कर अब नई रणनीति बना रहा है। किसी जगह पर तेंदुआ देखे जाने की ग्रामीणों की सूचना मिलने के बाद ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो जा रही है। तेंदुआ हमला न कर सके, इसके लिए वनकर्मियों को तीन दिन तक निगरानी पर लगाया जा रहा है।
इसके बाद पिंजरा ऐसी सटीक जगह पर लगाया जा रहा, जहां तेंदुआ घूम रहा है। पिंजरे में बकरी बांधकर वनकर्मी लगातार निगरानी कर रहे हैं। सबसे अच्छा यह है कि बफरजोन प्रशासन लगातार पिंजरों की संख्या बढ़ा रहा है। मूवमेंट की जानकारी होने पर अधिकारी तुरंत पिंजरा लगा दे रहे हैं।
इसका सुखद परिणाम भी सामने आ रहा है। पिछले 15 दिनों में पलिया के देवीपुरवा, धौरहरा के पंडितपुरवा, उत्तर निघासन के नौरंगाबाद और शुक्रवार को धौरहरा रेंज के पढुआ में एक तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ है। गुरुवार की रात संपूर्णानगर में एक बाघ पिंजरे में कैद हुआ है।
वन विभाग के ऑपरेशन से आम लोगों को राहत मिली है, लेकिन अधिकारियों के सामने अभी बड़ी चुनौतियां हैं। बफरजोन की उप निदेशक कीर्ति चौधरी कहती हैं कि सूचनाओं के सही आदान-प्रदान, वनकर्मियों की निगरानी और आम लोगों से मिल रहे सहयोग के कारण लगातार तेंदुए पकड़े जा रहे हैं। प्रयास किया जा रहा है कि ज्यादा से ज्यादा तेंदुओं को पकड़कर आबादी से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा।
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