तकनीकी खुफिया इनपुट और लोकेशन दिल्ली की मिलने पर आरोपित को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। आय से अधिक संपत्ति और जालसाजी से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में सीबीआइ (सेंट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन) को सफलता मिली है। करीब 14 वर्षों से फरार चल रहे घोषित अपराधी संतोष कुमार को सीबीआइ ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित को अब पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
सीबीआई ने यह मामला 17 जून 2008 को दर्ज किया था। उस समय बीएसएनएल रोहतक के तत्कालीन महाप्रबंधक चंद्रशेखर, संतोष कुमार और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे।
जांच के दौरान यह सामने आया कि संतोष कुमार ने स्वयं को एम/एस एलवीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का निदेशक या अधिकृत प्रतिनिधि बताकर छापेमारी के दौरान बरामद 85 लाख रुपये पर स्वामित्व का दावा किया।
जांच एजेंसी के अनुसार यह दावा एक सार्वजनिक सेवक को बचाने के उद्देश्य से किया गया था और इसके समर्थन में कथित रूप से फर्जी और जाली दस्तावेजों के आधार पर झूठी स्वामित्व श्रृंखला तैयार की गई।
मामले की जांच पूरी होने के बाद पंचकूला स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत में आरोपपत्र दायर किया गया था, लेकिन संतोष कुमार ट्रायल में शामिल नहीं हुआ। लगातार अनुपस्थित रहने के चलते 24 मार्च 2011 को अदालत ने उसे घोषित अपराधी करार दे दिया था।
सीबीआई द्वारा वर्षों तक आरोपित की तलाश जारी रही। हाल ही में तकनीकी खुफिया इनपुट और जमीनी स्तर पर की गई पुष्टि के आधार पर उसकी लोकेशन दिल्ली में चिह्नित की गई। इसके बाद विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस गिरफ्तारी को लंबे समय से लंबित मामले में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अब आरोपित को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश कर आगे की न्यायिक कार्यवाही की जाएगी। |
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