राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधान सभा में बजट सत्र के आठवें दिन बुधवार को मुख्य विपक्षी दल सपा ने शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने का मुद्दा उठाया। सपा के ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि 1.37 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं इन्हें इस महंगाई के जमाने में भी केवल 10 हजार रुपये महीना मिल रहा है।
एक ही विद्यालय में दो तरह के शिक्षक कार्यरत हैं, नियमित शिक्षक को एक लाख रुपये मिलते हैं जबकि शिक्षामित्र को मात्र 10 हजार रुपये मिल रहे हैं।
नौ वर्ष में सरकार ने इनके लिए कुछ नहीं किया। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विभाग के लिए शिक्षामित्रों की सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कैशलेस इलाज की मांग पूरी हो चुकी है।
शिक्षामित्रों के प्रति हमारी सरकार संवेदनशील हैं। सरकार आगे भी उनके हित में निर्णय लेगी और इस सदन को अवगत कराएगी।
ओम प्रकाश सिंह ने यह मुद्दा कार्यस्थगन प्रस्ताव के रूप में उठाते हुए सभी काम रोककर चर्चा कराने की मांग की थी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि कुछ लोगों का घर नहीं बसा है इसलिए उन्हें घर चलाने का दर्द भी नहीं पता है।
शिक्षामित्र आज भी 10 हजार रुपये महीना पर घर चलाने को मजबूर हैं। प्रदेश में कुल 1.37 लाख शिक्षा मित्र हैं। इनके लिए सरकार ने कुछ नहीं किया है। सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री ने कहा कि जब सपा की सरकार थी उस समय 2012 से 17 तक शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया।
जब हमारी सरकारी आई तो इनका मानदेय 3500 रुपये था जिसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया। शिक्षामित्रों के प्रति हमारी सरकार संवेदनशील हैं। सरकार आगे भी शिक्षामित्रों के हित में निर्णय लेगी।
शिक्षामित्रों की अपनी ग्राम पंचायतों में तैनाती को लेकर आदेश जारी हो गया है। अभी शिक्षामित्र एसआइआर में ड्यूटी कर रहे हैं। यह काम पूरा होने के बाद उन्हें मनचाही तैनाती दे दी जाएगी। शिक्षामित्रों को पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की मांग को भी सरकार ने स्वीकृत कर लिया है। |