पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर। (पीटीआई)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने बुधवार को कहा कि उनकी राजनीतिक पहचान का आधार महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और राजीव गांधी के विचार हैं। उन्होंने अपने बचपन का एक किस्सा साझा करते हुए कहा, \“\“जब मैं छह साल का था और मेरा भाई चार साल का, तब महात्मा गांधी ने हमें अपनी गोद में उठाया था और कहा था कि \“ये मेरी आंखों के सूरज और चांद हैं\“। उसी समय से मैं \“गांधीवादी\“ बन गया।\“\“
नेहरू के प्रभाव पर उन्होंने कहा कि जब मैं बड़ा हो रहा था तो उस समय मुझ पर नेहरूवादी लोकाचार की गहरी छाप रही। जब नेहरू प्रधानमंत्री बने तब मैं छह साल का था और उनके निधन के समय मैं 23 वर्ष का था। राजीव गांधी के बारे में उन्होंने कहा, \“\“राजीव मुझसे दो साल छोटे थे, लेकिन उन्होंने मुझे पीएमओ में लाकर और देश के लिए जो कार्य किए, उससे मुझे चकित कर दिया। इसी कारण मैं \“राजीववादी\“ बना।\“\“
मैं गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी- अय्यर
अय्यर ने स्पष्ट किया कि वह \“\“गांधीवादी\“\“, \“\“नेहरूवादी\“\“ और \“\“राजीववादी\“\“ तो हैं, लेकिन \“\“राहुलवादी\“\“ नहीं हैं क्योंकि राहुल गांधी \“\“मुझसे उम्र में बहुत छोटे हैं और राजनीतिक जीवन के अनुभव से मुझसे बहुत दूर हैं\“\“। उनके और राहुल के बीच उम्र और कार्यशैली का एक बड़ा अंतर है।
राहुल मुझसे तीस साल छोटे- अय्यर
उन्होंने कहा, \“\“कोई मुझसे राहुलवादी होने की उम्मीद कैसे कर सकता है? वह लड़का मुझसे करीब 30 साल छोटा है और मुझे उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला है।\“\“
अय्यर ने कहा, \“\“मैंने खुद को इंदिरावादी नहीं कहा क्योंकि मैं उनके द्वारा लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने के फैसले के सख्त खिलाफ था। भले ही आपातकाल केवल 18 महीने के लिए था, लेकिन मैं उसे पूरी तरह अस्वीकार करता हूं।\“\“
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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