पूजा स्थलों के अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई जल्द (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह जल्द ही हिंदुओं के पूजास्थलों से जुड़े \“प्लेसेज आफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन) एक्ट, 1991\“ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई करेगा और उस पर निर्णय करेगा।
यह अधिनियम किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को 15 अगस्त, 1947 के रूप में परिवर्तित करने पर रोक लगाता है और उस तिथि के अनुसार धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने की बात करता है। इस अधिनियम का उल्लंघन अवैध माना जाता है।
तिथि होगी निर्धारित
प्रेट्र के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जायमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी से अनुरोध किया कि अंतिम सुनवाई की तिथि निर्धारित की जाए क्योंकि प्रश्न 12 अक्टूबर, 2022 को तैयार किए गए थे।
वरिष्ठ वकील ने कहा कि केंद्र अभी तक अपना उत्तर प्रस्तुत नहीं कर सका है, जिसे 31 अक्टूबर, 2022 तक याचिका का उत्तर देने के लिए कहा गया था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, \“\“हम अंतिम सुनवाई के लिए एक तिथि निर्धारित करेंगे।\“\“
कोर्ट ने याचिका विचार से किया इनकार
हालांकि यह भी कहा कि मार्च और अप्रैल में पहले से ही दो नौ-न्यायाधीशों की पीठ के मामले तय हैं। हम 9-न्यायाधीशों की पीठ के मामले के बाद सुनवाई की तिथियों को अंतिम रूप देंगे।\“\“ इस बीच, शीर्ष अदालत ने अजमेर दरगाह मामले में एक सिविल कोर्ट को प्रभावी आदेश पारित करने से रोकने के लिए एक याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया।
सीजेआई ने कहा, \“\“यदि वे ऐसे आदेश पारित करते हैं, तो हम देखेंगे कि क्या किया जाना है। हमने एक आदेश पारित किया है और वह सभी पर बाध्यकारी है। यदि कोई उस आदेश का उल्लंघन करते हुए आदेश पारित करता है, तो हमें उसे जांचना होगा और देखना होगा.. परिणाम सामने आएंगे।\“\“
क्या है मामला?
हालांकि, पीठ ने कहा कि यदि नोटिस जारी किए जाते हैं और उत्तर मांगे जाते हैं, तो प्रक्रियात्मक आदेशों में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। 12 दिसंबर, 2024 को शीर्ष अदालत ने देश के न्यायालयों को धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से मस्जिदों और दरगाहों को पुन: प्राप्त करने के लिए नई याचिकाओं को स्वीकार करने और लंबित याचिकाओं में कोई प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया था।
12 अक्टूबर, 2022 को शीर्ष अदालत ने केंद्र से अनुरोध किया था कि वह 31 अक्टूबर तक पूजा स्थलों (विशेष प्रविधान) अधिनियम, 1991 की कुछ धाराओं की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के उत्तर में अपना हलफनामा प्रस्तुत करे।
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