मौत के 24 घंटों के अंदर ही पिता ने अपने बयानों को बदल लिया।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। 13 फरवरी को अमृतसर में एक हेउ कांस्टेबल के बेटे की मौत पर सवाल उठने लगे हैं। मौत के 24 धंटे के अंदर अमृतसर पुलिस की ओर से किया गया “फैक्ट चेक” चर्चा का विषय बना चुका है। इस फैक्ट चेक के 24 घंटे पहले एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एक हेड कांस्टेबल अपने 26 वर्षीय बेटे के शव के साथ सड़क पर बैठा नजर आ रहा था।
उसके पहले बोल थे- “बेटे की मौत ड्रग्स के कारण हुई है और गुरु नानकपुरा में खुलेआम नशे की बिक्री हो रही है।“ इसके बाद पुलिस का वीडियो जारी किया, जिसमें पिता अपने ही शब्दों से मुकरता दिखा और उसने पहला बयान भावुक होकर देना बताया।
वहीं, पुलिस का भी इसमें बयान सामने आया है। जिसमें कहा गया है कि युवक की मौत नशे से हुई नहीं लग रही है।
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बेटे के शव को देख रोती हुई मृतक की मां।
शुक्रवार हुई थी बेटे की मौत
अमृतसर के गुरु नानकपुरा इलाका, जो श्री हरिमंदिर साहिब से करीब 7 किलोमीटर दूर है, में रहने वाले हेड कांस्टेबल अशोक कुमार सैनी ने पिछले शुक्रवार अपने बेटे आकाश को खो दिया। सड़क पर रखे बेटे के शव के पास बैठा कांस्टेबल पिता अशोक सैनी ने कहा था कि उसके बेटे की मौत नशे से हुई। इलाके में ड्रग्स हासिल करना जैसे जोमैटो से ऑर्डर करने जैसा हो गया है।
अशोक बोलते देते दिख रहे थे कि उनका बेटा आकाश पढ़ाई और खेल दोनों में आगे था। उसने खालसा स्कूल और खालसा कॉलेज से फुटबॉल खेला और बाद में चीफ खालसा दीवान से होटल मैनेजमेंट में बीएससी प्रथम श्रेणी से पास की।
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साल 2020-21 से शुरू हुआ नशे का प्रभाव
अशोक के अनुसार वर्ष 2020-21 में, जब सैनी चुनाव ड्यूटी पर उत्तर प्रदेश गए थे, तभी उन्हें बेटे के गलत संगत में पड़ने की जानकारी मिली। उसके बाद वह पूरी तरह से टूट गए थे। परिवार ने कई बार उसे नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया। हर महीने 15 से 20 हजार रुपये खर्च किए गए। सैनी परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। उनका कहना है कि केंद्र से बाहर आते ही फिर वही माहौल मिल जाता था।
घटना वाले दिन आकाश दो महीने से नशा मुक्त था। वह 10 मिनट के लिए बाहर गया और बाद में बेहोश मिला। तब सैनी ने दावा किया था कि हेरोइन का एक इंजेक्शन जानलेवा साबित हुआ।
कांस्टेबल के बयान, एसीपी ने करवाया फैक्ट-चेक
हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच में ड्रग सेवन का कोई सबूत नहीं मिला। एसीपी जसपाल सिंह के अनुसार, शरीर पर इंजेक्शन के निशान नहीं थे और परिवार ने कोई कार्रवाई की मांग नहीं की है। एसीपी के अनुसार अशोक कुमार ने उस समय भावुक होकर बयान दे दिया।
पुलिस के वीडियो में अशोक ने भावनात्मक बयान के लिए माफी मांगी। वहीं बाद में उन्होंने इस मामले पर बात करने से इनकार कर दिया। अशोक के अनुसार वह अपने बेटे का शव देखकर भावुक हो गए थे। उन्होंने पहली वीडियो में ऐसी बातें कहीं, जो उन्हें नहीं कहनी चाहिए थी।
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