पटना हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला। सांकेतिक तस्वीर
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि मृत सरकारी कर्मी की दूसरी पत्नी से जन्मे पुत्र को भी अनुकंपा नियुक्ति के दावे से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपीलकर्ता के आवेदन पर गुण-दोष के आधार पर तीन माह के भीतर निर्णय लें।
न्यायाधीश सुधीर सिंह और न्यायाधीश राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने दूसरी पत्नी के पुत्र रवि कुमार रंजन द्वारा दायर लेटर पेटेंट अपील (एलपीए) पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
दोनों पत्नियों के पुत्र ने मांगी थी अनुकंपा पर नौकरी
मामला सिंचाई विभाग के एक कर्मचारी से जुड़ा है, जिन्होंने अपने जीवनकाल में दो विवाह किए थे। उनके निधन के बाद दोनों पत्नियों के पुत्रों ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
संबंधित विभागीय अधिकारियों ने दोनों में से एक आवेदन को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि बिना सरकारी अनुमति के किया गया दूसरा विवाह वैध नहीं माना जाएगा और दूसरी पत्नी से जन्मा पुत्र अनुकंपा नियुक्ति का पात्र नहीं है।
एकलपीठ ने भी कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के परिपत्र का हवाला देते हुए दूसरी पत्नी के पुत्र की याचिका खारिज कर दी थी तथा पहली पत्नी के पुत्र के आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया था।
खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई के बाद एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुनर्विचार हेतु प्रशासन के समक्ष भेज दिया है, जिससे अब अंतिम निर्णय तीन माह के भीतर लिया जाएगा। |
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