सांकेतिक तस्वीर।
संवाद सूत्र, बाराबंकी। 18 वर्ष नौ माह पुराने हत्या के मुकदमा में अपर सत्र न्यायाधीश, गैंगस्टर एक्ट, असद अहमद हाशमी ने तीन को दोषी करार देते हुए सभी को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। एक को बरी, गैंगस्टर में सभी को बरी कर दिया है।
विशेष लोक अभियोजक रमेश चंद्र वर्मा और प्रभाकर राय ने बताया कि देवा के जगदीशपुर निवासी छोटेलाल की नई बस्ती के यदुनंदन उर्फ जग्गू और विनोबा गांव के संतोष सिंह, लखनऊ मटियारी के रमेश पाल से जमीन की रंजिश थी। नौ मई 2007 को उनके भाई श्रीराम और चचेरा भाई विनय घर लौट रहे थे, गांव के मोड़ पर बाइक सवार तीनों आरोपित पहुंचे।
जग्गू ने बाइक लगाया और रमेश पाल ने श्रीराम की गोली मार हत्या कर दी थी। छोटे लाल ने देवा में तीनों पर मुकदमा कराया था। उन्होंने भाई श्रीराम की हत्या में सिकंदरपुर लखीमपुर निवासी अपने चाचा मिश्री की मिलीभगत बताई थी। रमेश पाल पर गैंगस्टर एक्ट की भी कार्रवाई की थी, चाचा मिश्री की संलिप्तता नहीं मिली थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए गए। बयान और दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जज ने यदुनंदन उर्फ जग्गू, संतोष सिंह और रमेश पाल को सजा सुनाई। 25-25 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है।
गैंगस्टर में बरी हुए तीनों
कोर्ट ने कहा अभियोजन पक्ष ने गैंगस्टर साबित नहीं हो सका, इसलिए सभी को इसमें बरी किया गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय की नजीर का हवाला देते हुए लिखा है कि अभियुक्त दोष सिद्ध किया जाए तो उसके साथ न्यायालय में उदारता या सहानुभूति प्रकट नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनके किए गए अपराध की यदि सजा न दी जाए तो उसे न सिर्फ विधि की क्षति होती है, बल्कि सामान्य जन का विश्वास भी प्रभावित होता है। |