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बिहार में अकौन और तीसी की खेती पर प्रोत्साहन, किसानों को बढ़ेगा आय का अवसर

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जिला अतिथिगृह में प्रेस को संबोधित करते वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह। जागरण  



जागरण संवाददाता, मधुबनी । केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को परिसदन में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार बिहार में अकौन और लिलेन तीसी की खेती को विशेष प्रोत्साहन देने जा रही है।

वस्त्र उद्योग में इसके रेशा और स्टिक (डंठल) दोनों की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए इसे सस्टेनेबल फाइबर योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे मिथिलांचल और उत्तर बिहार के किसानों के लिए आय के नए अवसर खुलेंगे और कृषि आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी।  
अकौन से बनेगा हल्का, गर्म और पर्यावरण अनुकूल कपड़ा

मंत्री ने बताया कि अकौन से तैयार कपड़ा पश्मीना से भी पतला, सिंथेटिक से हल्का और ऊन से अधिक गर्म होता है। इसकी विशेष संरचना इसे माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक की ठंड में उपयोगी बनाती है, वहीं गर्मी में भी यह शरीर के अनुकूल रहता है।

यह कपास की तुलना में अधिक तेजी से नमी सोखता है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अकौन के डंठल में पाया जाने वाला सेल्यूलोज कागज, बायो-कॉम्पोजिट और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में उपयोगी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
वैश्विक बाजार में बढ़ रही मांग

मंत्री ने कहा कि भारत में तीसी की खेती सीमित क्षेत्रों में होती रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर फ्रांस, बेल्जियम और चाइना इसके प्रमुख उत्पादक देश हैं। टेक्सटाइल क्षेत्र में इसके औद्योगिक ट्रायल कोलकता में सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं और शीघ्र ही बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू करने की तैयारी है।
मिथिला क्षेत्र के लाखों किसानों को सीधा लाभ

प्रारंभिक आकलन के अनुसार यदि मिथिला, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी और सुपौल जिलों में 25 से 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है, तो लगभग 1.5 से 2 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। इससे क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
एफटीए विस्तार से खुलेगा निर्यात का रास्ता

मंत्री ने बताया कि पहले भारत का एफटीए दायरा 10 देशों तक सीमित था, जो अब 27 यूरोपीय देशों सहित 56 देशों तक विस्तारित हो चुका है। इससे अकौन आधारित वस्त्रों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात का बड़ा अवसर मिलेगा और बिहार के किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।
टेक्सटाइल क्लस्टर और पारंपरिक कला को बढ़ावा

उन्होंने बताया कि गोहाटी जोन में टेक्सटाइल क्लस्टर की शुरुआत हो चुकी है, जहां जलकुंभी और पारंपरिक पेंटिंग को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। देशभर की पारंपरिक कलाओं, विशेषकर मिथिला पेंटिंग, को टेक्सटाइल उद्योग से जोड़ने की पहल की जा रही है।
मंत्री ने कहा कि मिथिलांचल में यह पहल कृषि विविधीकरण, ग्रामीण रोजगार और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली साबित होगी।
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