गंगा एक्सप्रेसवे पर बदायूं जिले में निर्माणाधीन धनुष आकार का टोल प्लाजा। जागरण
प्रदीप द्विवेदी, मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का काम अंतिम चरण में है। प्रदेश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे के 594 किलोमीटर के मुख्यमार्ग का निर्माण पूरा किया जा चुका है, लेकिन वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए एक्सप्रेसवे के किनारे 295 किलोमीटर की लंबाई में चहारदीवारी (बाउंड्रीवाल) और मेटल बीम क्रैश बैरियर का निर्माण किया जा रहा है। मेरठ से संगम नगरी प्रयाग तक की यात्रा तो आसान होगी ही, नए अनुभव भी होंगे। इस पर जल्द सफर शुरू होने की संभावना है।
गंगा एक्सप्रेसवे 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से संगम तक का आरामदायक यात्रा तो कराएगा ही, अनुभव भी यादगार बनाएगा। हालांकि, भारी वाहनों के लिए गति सीमा 80 किमी प्रति घंटा तय की गई है। मेरठ में प्रवेश करते ही डामर वाली सड़क पहियों की रफ्तार से ताल मिलाने लगेगी। यदि आरामदायक यात्रा में कहीं लेन से किनारे होने लगेंगे तो आपको सतर्क करने के लिए रेज्ड पेवमेंट मार्किंग से वाहन में कंपन होगा। सुंदरता बिखेर रहे रंग-बिरंगे फूल-पौधों के बीच थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगे कैमरे सुरक्षित यात्रा का भरोसा दिला रहे हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे पर मेरठ क्षेत्र में प्रवेश वाली लेन पर लगा एएनपीआर सिस्टम। जागरण
आटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर अपने आप काटेगा शुल्क
एक्सप्रेसवे पर आटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR) सिस्टम अपने आप वाहनों का नंबर पढ़कर निकास वाले स्थान के हिसाब से शुल्क काट लेगा। मेरठ में इस एक्सप्रेसवे का प्रवेश स्थल मेरठ-बुलंदशहर हाईवे पर बिजौली गांव में है, जहां पर पास में ही इस परियोजना के अंतर्गत 529 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू है।
मेरठ से 146 किलोमीटर दूर बदायूं जिले में प्रवेश करते ही धनुष आकार का टोल प्लाजा मिलता है। प्रयागराज तक इस तरह के चार प्लाजा बनाए जा रहे हैं। मेरठ से गढ़मुक्तेश्वर के बीच सिंभावली में रेलवे ओवरब्रिज पर सस्पेंशन लगाया जा रहा है। किनारों पर मिट्टी की कटान रोकने के लिए नारियल मैट बिछाकर घास रोपने का कार्य चल रहा है।
दावा है कि एक बार अगर वाहन एक्सप्रेसवे पर चढ़ता है तो उतरने तक निगरानी बनी रहेगी। मेरठ से यात्रा शुरू करने पर 13 किमी दूर खड़खड़ी में पहला टोल प्लाजा मिलता है लेकिन यहां बूम बैरियर नहीं, उन्नत तकनीक दिखाई देती है। मेरठ से बदायूं तक एक्सप्रेसवे के अधिकांश हिस्से में जहां आबादी क्षेत्र है या कोई पुराना मार्ग है, उसे जोड़ने के लिए सर्विस रोड बनाई गई है। इससे 100 से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिल रहा है। |
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