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कैमूर जिले में चौथे दिन भी बाढ़ का असर, यूपी-बिहार का संपर्क पथ रहा बंद, लोग परेशान

Chikheang 2025-10-9 00:36:39 views 1259
  बाढ़ का असर: यूपी-बिहार का संपर्क पथ रहा बंद





संवाद सूत्र, रामगढ(कैमूर)। प्रखंड क्षेत्र में कर्मनाशा व दुर्गावती नदी के उफान से चौथे दिन भी बाढ़ से राहत नहीं मिली। बुधवार को भी यूपी के गाजीपुर से रामगढ़ का संपर्क नहीं जुड़ सका है। यूपी के दिलदारनगर जाने वाले महत्वपूर्ण रामगढ़ बड़ौरा पथ पर बड़ौरा पुल पार यूपी की सीमा में अभी भी चार फीट से अधिक पानी का बहाव जारी रहने से यातायात प्रभावित है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

नदियों का जलस्तर इतनी धीमी गति से घट रहा है कि बाढ़ का पानी उतरने में अभी दो तीन दिन और लगने की संभावना जताई जा रही है। उधर तीन ओर से दुर्गावती और कर्मनाशा नदी से घिरे आंटडीह गांव के 15 घरों में बाढ़ का पानी घुसने से ग्रामीण परेशानी झेल रहे हैं। गांव के निचले हिस्से के जिन घरों में पानी घुसा है उन घरों के लोग अपने मवेशियों के साथ मध्य विद्यालय परिसर में शरण लिए हुए है।



ग्रामीणों ने बताया कि लगता है कि अभी हफ्ते भर स्कूल में ही आश्रय लेना पड़ेगा क्योंकि बाढ़ का पानी उतरने में कम से कम चार दिन लगेंगे। इसके बाद भी दो तीन दिन घर में शिफ्ट होने में समय लगेगा। ग्रामीणों ने बताया कि राहत की बात बस इतनी है कि अभी पश्चिम दिशा से कच्चा रास्ता नहीं डूबा है जिससे आवाजाही हो रही है। दैनिक आवश्यकता के लिए रामगढ़ से खरीदारी संभव है।

हालांकि मवेशियों के लिए चारा का प्रबंध करने में काफी फजीहत झेलनी पड़ रही है। आंटडीह गांव में 15 घरों में बाढ़ का पानी घुसा है। उधर नदियों में उफान से चार दिन से चौतरफा जलमग्न फसलों के बर्बाद होते देख किसानों के होश उड़ गए हैं। उधर दुर्गावती नदी के जलस्तर में भी कमी धीमी गति से होने से किसान हताश हैं।



नरहन, गोड़सरा, पनसेरवां, भटौली, जमुरना, अकोढ़ी, बंदीपुर समेत कई गांव के बधार में फसलें डूबी हुई है। कर्मनाशा के बाढ़ में सराय, इमिलियां, तरोइयां, नोनार, बड़ौरा, आंटडीह, नरहन आदि गांवों के अलावा गोरिया नदी के पानी से पूर्वी इलाके की चार पंचायतों के बधार में धान व सब्जी की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई है।

दुर्गावती नदी के बाढ़ में पनसेरवां गांव की सड़क डूबी हुई है। बड़ौरा रामगढ़ पथ से यूपी का संपर्क कटने के चलते लोग डेहूड़ी घाट वाले पुल के रास्ते यूपी जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जलमग्न धान की फसल में धान के दाने लगने लगे थे जिसे मछलियां व अन्य जलीय जीव काटकर बर्बाद कर चुके होंगे।



बाढ़ का पानी उतरने पर पैदावार प्रभावित होना तय है। पैदावार के पईया होने की संभावना है। उस फसल की कटाई के लिए मजदूर भी तैयार नहीं होंगे।
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