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गाजियाबाद के भोजपुर मालखाने से हेड मोहर्रिर ने 80 हजार निकाले, तत्कालीन एसएचओ पर उठे सवाल

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जागरण संवाददाता, मोदीनगर। भोजपुर थाने में फर्जी पते पर पासपोर्ट सत्यापन का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि फिर से पुलिस की मनमानी सामने आ गई। तीन साल पहले थाने में तैनात हेड मोहर्रिर गजेंद्र सिंह ने मालखाने में 80 हजार की हेराफेरी कर दी। अब विभागीय जांच हुई तो राज खुला।
तत्कालीन एसएचओ पर भी संदेह

विवेचना संबंधित खर्च के नाम पर गजेंद्र ने मालखाने से 80 हजार रुपये निकाले थे, लेकिन खर्च के संबंध में कोई दस्तावेज पेश नहीं किए। 2024 में गजेंद्र सिंह की मौत हो चुकी है। भोजपुर थाने में एसएचओ की तरफ से गजेंद्र के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अब ऐसे में उस समय तैनात रहे थाने के एसएचओ की भूमिका पर भी संदेह से इनकार नहीं किया जा सकता है।
मालखाने के हेड मोहर्रिर ने खेल कर दिया

गाजियाबाद जिले का भोजपुर थाना इन दिनों चर्चा में है। फर्जी पासपोर्ट सत्यापन के मामले में थाना प्रभारी समेत नौ पर गाज गिरी। थाने में तैनात सिपाही का नाम मुकदमे में शामिल किया गया। छह लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अब थाने के मालखाने में जमा रकम का ही मालखाने के हेड मोहर्रिर ने खेल कर दिया।
कागजी कार्रवाई पूरी कराने के नाम पर मुकदमा

प्रकरण पिछले दिनों सामने आया तो पुलिस उच्चाधिकारियों ने जांच बैठाई। एसीपी मसूरी व एसीपी वेबसिटी द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इस जांच में हेड मोहर्रिर मुख्य आरक्षी गजेंद्र सिंह का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जानकारी की तो पता चला कि मार्च 2024 में हेड मोहर्रिर की मौत हो चुकी है लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी कराने के नाम पर उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
मालखाने के सामान की हेड मोहर्रिर की होती है जिम्मेदारी

प्रत्येक थाने में मालखाना होता है, इस मालखाने के सामान का हिसाब मालखाना हेड मोहर्रिर रखता है। आपराधिक घटनाओं में सीज हुए वाहन, अपराधी से बरामद हथियार, रकम, लूट-चोरी बरामदगी का माल समेत अन्य सामान मालखाने में ही रखा जाता है।
थाने में मुकदमा दर्ज, एसीपी को नहीं जानकारी

प्रकरण में पक्ष लेने के लिए एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा को काल की तो उन्होंने घटना की जानकारी से इनकार कर दिया। जबकि थाने में शनिवार देर रात केस दर्ज हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता है कि इस तरह का कोई मुकदमा थाने में दर्ज है। ऐसे में साफ है कि पुलिस की मनमानी काे सार्वजनिक होने से बचाने की अधिकारी कोशिश में हैं।

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