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महाशिवरात्रि: शिमला में ढोल नगाड़ों के साथ निकली भोलेनाथ की बरात, सेहरा और नोटों के हार पहनाए; राम मंदिर में हुआ विवाह

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शिमला में शिवरात्रि पर निकाली गई भगवान भोलेनाथ की बरात। जागरण  



जागरण संवाददाता, शिमला। महाशिवरात्रि पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में ढोल नगाड़ों के साथ भोले की बरात निकली। शिमला के राधा कृष्ण मंदिर में विधि विधान के साथ भगवान भोलेनाथ को सेहरा लगाया गया। भोलेनाथ के श्रृंगार के साथ विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की गई।

राधाकृष्ण मंदिर से सुबह 10 बजे राम मंदिर के लिए भोले की बरात निकली। इस दौरान पूरा शहर भगवान शिव के जयरकारों से गूंज उठा। ढोल नगाड़ों के साथ निकली शोभायात्रा में शिव परिवार की रंगारंग झांकियां निकलीं।  

बरात में शामिल शिव भक्तों ने सिर पर पगड़ी बांधी हुई थी। वहीं, भोलेनाथ को सेहरा बांधा गया था। नोटों के हार भी डाले गए थे। भोलेनाथ की मूर्ति को उठाकर भक्त नाचते गाते आगे बढ़ रहे थे।  
दोपहर एक बजे हुआ विवाह

इसके बाद राममंदिर में दोपहर एक बजे विधि विधान से भगवान शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। शाम को बरात वापस राधाकृष्ण मंदिर के लिए लौटेगी। विधि विधान से शाम साढ़े छह बजे गृह प्रवेश की परंपरा होगी।  
शिवालयों में जयकारे

वहीं दूसरी ओर शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ की बरात का स्वागत करने और शिवालयों में आशीर्वाद लेने के लिए भारी संख्या में शिव भक्त उमड़े। सुबह से ही शिवालयों में शिव भक्तों का तांता लग गया। श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।  
शिमला के इन मंदिरों में जुटी भीड़

मिडल बाजार स्थित प्राचीन शिव मंदिर, लिफ्ट के पास शिव मंदिर के अलावा अन्य शिवालयों में सबसे ज्यादा भीड़ लगी। मंदिर में पूजा करने आ रहे श्रद्धालु अपनी पूजा थाल में शिव भगवान की पसंदीदा वस्तुओं दूध, जल, पंचामृत, बिल्वपत्र, चंदन फूल, मिठाई आदि से पूजन किया। शिमला के लोअर बाजार में शिव भक्तों ने झांकियां निकाली, जिसमें ढोल नगाड़े के साथ नाच गाना किया गया। इन झांकियों में कई लोग शामिल हुए। यह झांकी लोअर बाजार से होते हुए मिडल बाजार, गंज बाजार राम मंदिर तक गई।
ऊपरी शिमला में पुरानी परंपराओं से मनाई शिवरात्रि

शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में पुराने रीति रिवाज के साथ महाशिवरात्रि का पर्व मनाया गया। लोगों घरों में कई तरह के पकवान बनाए। जिनमें पकैन, सनसे व रोट मुख्य समेत कई तरह के पकवान बनाए गए। शाम के समय महादेव की परंपराओं के अनुसार पूजा संपन्न हुई। लोगों ने महादेव की पूजा से परिवार एवं समाज की खुशहाली के लिए कामना की। इसके अलावा जगह जगह शिव भक्तों व लोगों को प्रसाद का वितरण किया गया। शिव भक्तों ने व्रत रखे है और उनके लिए फलाहार का वितरण किया गया, जबकि कई जगहों पर भंडारों का प्रसाद वितरित किया गया।

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